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रहस्‍य: भारत के ये स्थान हैं सबसे अलग: जानें क्‍यों

भारत सहित दुनिया में बहुत से ऐसे स्‍थान हैं जो आज भी
हमारे लिए रहस्‍य बने हुए हैं।
आज हम आपको कुछ ऐसे ही रहस्‍यपूर्ण स्‍थानो के बारे
में बताने जा रहे हैं।
जो हमारे लिए आज भी किसी पहेली से कम नहीं है।
इन्‍हीं रहस्‍य पूर्ण स्‍थानों में एक है कैलाश पर्वत का
बनावट पिरामिडनुमा आकार का है।
लोगों का मानना है कि
कैलाश पर्वत पर उपस्थित अन्य पर्वतों की तुलना में
बिल्कुल अलग है और समय-समय पर कैलाश पर्वत से
जुड़े कई सारे रहस्यमय प्रश्नो का उजागरन होते रहते हैं।

आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं पहुंचा इंसान

कैलाश पर्वत भी रहस्य से घिरा हुआ है।
आज तक कैलाश पर्वत पर न पहुंच पाने का प्रश्न भी
एक रहस्य से भरा हुआ है।
कुछ भौगोलिक जानकारों के अनुसार कैलाश पर्वत का स्थान हमेशा बदलते रहता है, जिसके कारण वहां पर आज तक कोई नहीं जा पाया।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि
कैलाश पर्वत अपने स्थान पर घूमते रहता है,
जिसके कारण जो भी लोग वहां जाना चाहता है वे
दिशा भ्रमित हो जाते हैं, जिसके कारण उन्हें कैलाश
पर्वत पर जाने का सही मार्ग नहीं पता चल पाता

तैरते पत्थरों का रहस्य

हिन्दू पौराणिक कथाओं में बताया गया हैं कि श्रीराम ने अपनी पत्नी सीता को रावण से बचाने के लिए श्री लंका पहुंचने के लिए एक फ्लोटिंग पुल का निर्माण करवाया था।
यह Floating Bridge रामसेतु या एडम ब्रिज के नाम से जाना जाता है।
यह पुल पूरी तरह से फ्लोटिंग पत्थरों से बना हुआ है,
लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र के आसपास
मौजूद सभी पत्थरों में
कुछ पत्थर सामान्य स्थिति में हैं।
लेकिन जब इन्हें पानी में डालते हैं तो यह तैरते हैं।
इसका बहुत वैज्ञानिकों द्वारा अध्धयन किया जा चुका है।
लेकिन वैज्ञानिक इसके पीछे के रहस्य को अभी
तक सबके सामने नहीं ला पा सके।

बेलेंसिंग चट्टान (तमिलनाडु)

Balancing Rock तमिलनाडु के महाबलीपुरम में स्थित है।
महाबलीपुरम में एक विशाल चट्टान की तीव्र ढलान पर एक पत्थर रखा हुआ है,
जिसे देखने पर यह लगता है कि यह पत्थर कभी भी लुढ़क सकता है।
इस चट्टान के 20 फुट ऊपर होने का अनुमान है।
यहां के लोगों का यह मानना हैं कि यह भगवान
श्री कृष्ण का मखन का मटका था, जो आसमान से गिरा है।
यह देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
पर्यटक ये देखकर आश्चर्यचकित हैं कि यह
चट्टान इतनी तीव्र ढलान पर स्थिर कैसे रह सकती हैं?
1908 में अंग्रेज़ी सरकार ने इसे हटाने की कोशिश भी थी।
लेकिन उनकी ये कोशिश काम नहीं आई।

अश्वत्थामा का रहस्‍य

जिसने महाभारत पढ़ी या देखी होगी, उन्हें अश्वत्थामा के बारे में बिल्कुल पता होगा।
अश्वत्थामा कौरव और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे,
जो महाभारत के युद्ध में कौरवों की तरफ से लड़े थे।
इनकी एक गलती के कारण श्री कृष्ण भगवान ने
इन्हें श्राप दे दिया कि दुनिया के अंत होने तक
इनकी आत्मा भटकती रहेगी।

आज भी माना जाता है कि अश्वत्थामा की आत्मा भटक रही है।
हालांकि इसका कोई प्रमाणित सच नहीं मिलता फिर भी कई लोगों द्वारा कई जगह पर अश्वत्थामा के देखे जाने का दावा किया गया है।
ऐसा ही मध्यप्रदेश के
बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर असीरगढ़ का किला है,
जिसके अंदर भगवान शिव का मंदिर है।

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वहां पर अश्वत्थामा को देखे जाने का दावा किया गया है। वहां की स्थानीय लोग कहते हैं कि अश्वत्थामा यहां पर आज भी भगवान शिव की पूजा करने के लिए आते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि किले के अंदर एक तालाब भी स्थित है, जहां पर अश्वत्थामा पूजा करने से पहले नहाते हैं।

वहां की स्थानीय लोग कहते हैं कि जिसने भी अश्वत्थामा को अपनी आंखों से देखा, उसकी मानसिक स्थिति हमेशा के लिए खराब हो गई।

केवल यही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर के गोरीघाट के किनारे भी अश्वत्थामा के भटकने का दावा लोगों के द्वारा किया गया है। वहां की स्थानीय लोग कहते हैं कि अश्वत्थामा अपने सिर पर लगे गांव से निकलने वाले खून को बंद करने के लिए हल्दी और तेल यहां के लोगों से मांगते हैं।

भानगढ़ किलेे का रहस्‍य

यदि अपने अपने दिमाग से भूत-प्रेत और आत्माओं के विचरों को हटा दिया है तो आपको Bhangarh Fort सोचने को मजबूर कर देगा। यह राजस्थान के अलवर में स्थित है। यहां के लोगों और पर्यटकों द्वारा यह भी बताया गया हैं कि यहां पर कुछ संदिग्ध घटनाएं हुई है। यह किला सुंदर वास्तुकला, हवेली, मंदिर, खंडहर, उद्यान से सज्जित है। यह लोगों के लिए देखने के लिए भी खुला है और कई पर्यटको ने यह भी स्वीकारा कि उन्हें आत्माओं की आहट सुनने को मिली है। यह भी यहां पर माना गया है कि जो भी रात में वहां गया है वो कभी वापस नहीं आया है।

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इसे लोग Kile ka Rahasya मान रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां पर एक चेतावनी का बोर्ड भी लगाया है, जिस पर लिखा है कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले इस किले में जाने पर प्रतिबन्ध है।

समुद्र के नीचे द्वारिका

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी जहां पर उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय बिताए थे, वह थी द्वारिका। जो गुजरात के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के द्वीप पर स्थित है। द्वारकापुरी का अपना एक धार्मिक, पौराणिक और ऐतहासिक महत्व है। लेकिन इससे भी ज्यादा यह रहस्य से भरा हुआ है।

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आज भी लाखों की संख्या में लोग यहां पर पूजा करने के लिए आते हैं लेकिन आज जो मंदिर द्वारिका में स्थित है, वह असल में भगवान श्री कृष्ण द्वारा बसाई द्वारिका नहीं है। कहा जाता है श्री कृष्ण द्वारा बसाई गई द्वारिका उनकी मृत्यु के बाद समुद्र में विलीन हो गई। आज भी वैज्ञानिक इस मंदिर को महाभारत कालीन निर्माण नहीं मानते हैं। उनका भी यही मानना है कि श्री कृष्ण द्वारा बसाई गई द्वारिका समुद्र में डूब गई होगी और शायद उसका अवशेष आज भी मौजूद होगा।

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इसी वजह से काफी शोधकर्ताओं ने पुराणों में वर्णित द्वारिका के रहस्य का पता लगाने का प्रयास किया। उन्होंने इन तथ्यों के आधार पर साल 2005 में एक अभियान शुरू किया, जिसमें भारत के नौसेना की मदद से समुद्र की गहराई में भगवान श्री कृष्ण द्वारा बसाए गए द्वारिका के अवशेष का खोज शुरू हुआ।

ताजमहल के गुप्त द्वार का रहस्‍य

भारत में जितने भी पौराणिक ऐतिहासिक इमारतें हैं, उन सभी से कुछ ना कुछ रहस्य की चीजें जुड़ी हुई है। विश्व के सात अजूबों में एक ताजमहल से भी ऐसा ही एक रहस्य जुड़ा हुआ है।

कहा जाता है कि ताजमहल का जितना ऊपरी हिस्सा हम देखते हैं, असल में वह पूरा हिस्सा नहीं है। ताजमहल का केवल आधा हिस्सा ही ऊपर है। ताजमहल का बाकी का आधा हिस्सा जमीन के अंदर तहखाने के रूप में है।

कहा जाता है इस तहखाने में जाने के लिए एक दरवाजा है, जो हमेशा से बंद कर दिया गया है। मुगल सम्राट शाहजहां के द्वारा इस दरवाजे को उपयोग में लाया जाता था। लेकिन उनके मृत्यु के बाद ये दरवाजा सदियों से बंद ही है। अंदर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। आखिर ऐसा क्या रहस्‍य है, जो आज तक इस दरवाजे को बंद रखा गया है। यह पूरी तरीके से रहस्य से भरा हुआ है।

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