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आज से पहले कामाख्या देवी मंदिर के इस रहस्‍य को नहीं जानते होंगे आप

दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं
जो सदियों से रहस्य और कहानियों से भरा पड़ा है।
क्योंकि कामाख्या देवी मंदिर के संबंध में एक से बढ़कर एक
अनोखे चमत्कार होते हैं। जिसके बारे में पता चलने के बाद आपके होश उड़ जाएंगे।
तो दोस्तो आखिर क्या है इस मंदिर में खास और इस मंदिर को इतना मानते हैं खास ?

कामाख्‍या देवी

दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गुवाहाटी असम का
सबसे बड़ा शहर है। यह शहर रहस्‍यों से भरा पड़ा है।
सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र होने के
कारण आप यहां पर विभिन्न धर्म और क्षेत्र के लोगों को
एक साथ मिलजुल कर रहते हैं
अगर आपने कामाख्या मंदिर को नहीं देखा और
कामाख्या देवी के दर्शन नहीं किए तो आपकी यात्रा
सफल मानी नहीं जाएगी क्योंकि यह गुवाहाटी का
सबसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।

कामाख्या मंदिर का रहस्‍य

मंदिर इतना ज्यादा लोकप्रिय है कि इस संबंध में होने वाले
चमत्कारों के विषय में कई सारी किताबें भी लिखी गई
और हजारों लोग ऐसे हैं जो इस मंदिर के चमत्कारों के
समय होने का सबूत देते हैं। इस मंदिर में देवी कामाख्या के अलावा
देवी काली के दस अन्य रूप देखने को मिलेंगे।
कामाख्या देवी के मंदिर के रहस्यों की बात करें
सबसे अनोखी बात की है कि यहां पर भक्तों को प्रसाद के
रूप में गीला कपड़ा दिया जाता है जिसे अंबुबाची वस्त्र कहते है।

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अंबुबाची पर्व के दौरान इस मंदिर में आए भक्तों को यह प्रसाद
दिया जाता है ऐसा माना जाता है कि देवी के रजस्वला होने के कारण
मंदिर की मूर्ति के आसपास सफेद कपड़ा बिछा दिया जाता है।
जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं तो यह कपड़ा
पूरी तरह गीला हो जाता है। यह कपडा भक्‍तों को प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है।
आपको यह सुनने में काफी अजीब लग रहा होगा
लेकिन अभी तो बस शुरुआत है क्योंकि कामाख्या देवी के
मंदिर से और भी कई सारे राज जुड़े हैं।

दोस्तों से बताया जाता है कि मंदिर के अंदर देवी शक्ति की कोई भी मूर्ति नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि बिना मूर्ति के भला कैसा मंदिर हुआ तो दोस्तों जब आप इस मंदिर में प्रवेश करेंगे तो आपको मंदिर के अंदर योनि नुमा संरचना दिखेगी और उस संरचना की पूजा देवी शक्ति की योनि के रूप में होती है।

51 शक्तिपीठों में से एक

सबसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठ अगर हम हिंदू धर्म की बात करें तो यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। इसी वजह से इसकी गिनती महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में होती है। गुवाहाटी से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद नीलांचल की पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर के साथ मां को समर्पित दस अलग-अलग मंदिर मौजूद हैं। कामाख्या देवी को बहते हुए खून की देवी भी कहा जाता है। यहां पर गर्भ और योनि को मंदिर के गर्भ गृह में रखा गया जिसमें जून के महीने में दिन में रक्त का प्रवाह होता है।

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यहां के लोगों की मान्यता है कि इस समय देवी अपने मासिक चक्र में होती है। और इसीलिए यहां पर मौजूद ब्रह्मपुत्र नदी लाल हो जाती है। यहां के लोग इस चीज को बहुत ही श्रद्धा और आस्था से देखते हैं। मासिक चक्र के समय मंदिर का एक और रोचक तथ्‍य बताएं तो यह कि देवी के मासिक चक्र के दौरान मंदिर बंद रहता है। ब्रह्मपुत्र नदी के लाल पानी को यहां आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। और भक्त बड़े चाव से देवी के प्रसाद को लेना नहीं भुलते है।

दोस्तों इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी में इस मंदिर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। 17 वीं शताब्दी में बिहार के राजा नर नारायण इसे दोबारा से बनवाया।

मंदिर का शिखर

मधुमक्खी के छत्ते की तरह निर्मित छत दोस्तों अगर रोचक तथ्‍य की बात करें तो इस मंदिर के शिखर को बिल्कुल मधुमक्खी के छत्ते की तरह बनाया गया है जिसमें भगवान गणेश के अलावा हिंदू धर्म से जुड़े अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद है।

लाल नदी का रहस्य

लाल नदी का रहस्य जैसा कि हमने अभी आपको बताया कि जब भी देवी मां रजस्वला होती है नदी के लाल रंग की वजह से यहां की नदी का पानी भी लाल हो जाता है। हालांकि इस पर कोई पुख्ता सबूत नहीं है। लाल रंग देवी के रज का ही है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यहां के पुजारी ब्रह्मपुत्र नदी में सिंदूर डालते हैं जिसकी वजह से यहां का पानी लाल हो जाता है।

स्त्री की रचनात्मकता

कुछ भी कहिए यह मंदिर है बहुत ही शानदार है जिसमें आपको स्त्री की रचनात्मकता देखने को मिलती है और यह भी पता चलता है कि इस ब्रह्मांड को चलाने वाली सिर्फ और सिर्फ स्त्री है। इसलिए हमें हर हाल में स्त्री का सम्मान करना चाहिए और उसके शरीर से जुड़ी चीजों को भी एक बायोलॉजिकल पॉइंट से देखना चाहिए।

तांत्रिकों का गढ़

दोस्तों अब बात करते हैं इस मंदिर में सबसे अहम चीज की क्योंकि आप भले ही न जानते हो लेकिन इस मंदिर को तांत्रिकों का गढ़ कहा जाता है। जहां पर कई सारे तांत्रिक अपनी तंत्र विद्या का प्रयोग करके देवी काली के संपर्क में आना चाहते हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि मंदिर बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण जगह है। जहां पर अलग-अलग तरह के चमत्कार देखने को मिलते हैं। इसलिए आपको यहां पर कई सारे तांत्रिक देवी काली के स्वरूप को पूजते में मिल जाएंगे।

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