आखिर कब बनेगा ओवर ब्रिज, जनता को कब मिलेगी जाम से मुक्ति

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रिपोर्ट- मोनू सिंह चौहान ब्यूरो लखनऊ 

बंथरा, लखनऊ । कहते हैं अगर शिद्दत से चाहो तो भगवान भी मिल जाते हैं और बड़ी से बड़ी समस्याओं का भी हल हो जाता है। किंतु यह कहावत निराधार साबित हो रही है हरौनी क्षेत्र की जनता के लिए।
बताते चलें कि हरौनी कस्बा राजधानी की सबसे व्यस्ततम रूट में से एक कटिबगिया से मोहान रूट पर है जिस पर दिल्ली की ओर से पूर्वांचल को जाने वाले सैकड़ों बड़े वाहनों का रोजाना आवागमन होता है साथ ही कस्बे के चारों ओर लगभग 2 दर्जन से अधिक गांव की जनता के लिए आजीविका, आवागमन ,बच्चों के स्कूल व बाजार का मुख्य माध्यम भी हरौनी कस्बा ही है जिसके लिए उन्हें कस्बे पर ही निर्भर रहना होता है। इसके अलावा कस्बे के रूट पर ही लखनऊ कानपुर रेलवे लाइन भी है जोकि अति व्यस्ततम रूट है। सड़क के इतने भारी ट्रैफिक के अलावा ट्रेनों के आने- जाने के चलते कुछ- कुछ मिनटों में ही फाटक बंद हो जाता है। ओवर ब्रिज ना होने से फाटक के दोनों ओर रोजाना काफी लंबा लंबा भारी वाहनों का जाम लग जाता है और यह जाम की समस्या निरंतर कई वर्षों से लगातार बनी है। इस लगने वाले जाम में रोजाना आने जाने वाले यात्रियों के साथ बच्चों के स्कूली वाहन के अलावा आए दिन एंबुलेंस भी फंसी रहती है कभी-कभी तो एंबुलेंस के जाम में फंसने के कारण उसमें पड़े मरीज की जान भी निकल जाती है। बावजूद क्षेत्र की जनता को रोजाना लगने वाले इस भयंकर जाम से मुक्ति का कोई भी मार्ग नहीं दिख रहा है।

पुलिस करती है नजरअंदाज

इतने जाम के बावजूद यहां पर दिन में किसी प्रकार की भी रेलवे पुलिस की व्यवस्था नहीं है इसके साथ साथ सड़क के दोनों ओर भयंकर जाम को हरौनी चौकी पुलिस भी नजरअंदाज करती है। फाटक के दोनों ओर चाहे कितना भी भीषण जाम लगा रहे चौकी पुलिस को कोई भी वास्ता नहीं रहता है।

चुनावी वादों में शामिल रहती है यह समस्या

हरौनी क्षेत्र की इस विकट समस्या का कोई हल तो नहीं निकल रहा है बशर्ते इस विकट समस्या को दूर करने का वादा हमेशा चुनाव में जरूर किया जाता रहा है कि चुनाव जीतते ही ओवर ब्रिज का निर्माण करवा दिया जाएगा और चुनाव निकल जाने के बाद जीते हुए जनप्रतिनिधियों द्वारा यह वादा भुला दिया जाता है।
हमेशा चाहे विधायकी के चुनाव रहे हो या सांसद के चुनाव रहे हो सभी जनप्रतिनिधियों द्वारा इस विकट समस्या से क्षेत्रवासियों को निजात दिलाने का वादा हमेशा किया गया किंतु निर्वाचित होने के बाद कभी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया गया। जिससे क्षेत्र की जनता में भयंकर रोष पनप रहा है। हां कभी-कभी जनता की हमदर्दी के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा चर्चा व छोटी मोटी सभाएं अवश्य कर ली जाती है जैसा कि बीते वर्ष सांसद कौशल किशोर के द्वारा किया गया था। लेकिन विधानसभा की जीती हुई जनप्रतिनिधि जिन्हें अब राज्य मंत्री का दर्जा भी प्राप्त है कभी भी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया गया जिससे आए दिन भारी वाहनों की बढ़ती संख्या के चलते क्रॉसिंग के दोनों ओर लंबी-लंबी कतारें लगी रहती है। हमेशा की तरह आज सुबह कटिबगिया मोहन मार्ग पर हरौनी के समीप सुबह-सुबह स्कूल जा रहे एक छात्र को ट्रक ने जबरदस्त टक्कर मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
राजधानी का सबसे व्यस्ततम रूट होने के बावजूद सड़क ना तो चौड़ी है ना ही इस 20 किलोमीटर सड़क पर किनारे पटरी है।
कम चौड़ी सड़क होने के चलते व पटरी ना होने से अक्सर इस प्रकार की दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
स्थानीय निवासी एवं ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश सिंह चौहान बताते हैं कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग को सड़क के किनारे पटरी बनाने के लिए पत्र लिखा है। इसके बावजूद विभाग है कि न सुनता है न देखता है।
जिससे अक्सर क्षेत्रवासी दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं।

कस्बे के व्यापारियों का धंधा होता है प्रभावित

रेलवे क्रॉसिंग के बंद होने के चलते फाटक के दोनों ओर भारी वाहनों का तांता लग जाता है इसमें क्षेत्र वासियों का पैदल व मोटरसाइकिल से निकलना दुश्वार हो जाता है जिससे क्षेत्रवासियों का लगातार कस्बे से मोहभंग होता जा रहा है। जिसके चलते कस्बे के व्यापारियों का धंधा भी प्रभावित हो रहा है। राजेश सिंह बताते हैं कि कस्बे में उनकी भी मार्केट है जिसमें क्षेत्र के विभिन्न लोग तरह-तरह की दुकान खोले हैं वाहनों की कतार से सड़क जाम हो जाने के चलते दुकानों के व्यापार पर बड़ा बुरा असर पड़ रहा है। कस्बे का समूचा व्यापार चौपट हो रहा है, बावजूद जनप्रतिनिधियोंसे लेकर सरकार का क्षेत्र की जनता की इस विकराल समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं है। जिस कारण कस्बे का व्यापार ठप होने के साथ-साथ क्षेत्र में भयंकर बेरोजगारी पनप रही है। लोगों का कहना है कि अगर यहां पर ओवर ब्रिज का निर्माण हो जाए तो उनकी समस्या का हल हो जाएगा।