किसान नेता ने जिला अधिकारी से लगाई सुरक्षा की गुहार

341
newyearwish

लखनऊ। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद पिछली सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए, जिसमे से प्रदेश ने चल रहे अवैध क़त्लखानों में हो रहे गोवध को रोकने के लिए पहले तो चल रहे अवैध कत्लखाने बंद कराए गए, वहीं जो नियमतह चल रहे थे उनमें गोवंशसों की कटान को पूर्णतह प्रतिबंधित कर दिया गया।

जिसके परिणाम स्वरूप संपूर्ण प्रदेश में गोवंशो की बाढ़ सी आ गई। अब गोवंश सड़कों से लेकर किसानों की फसलों पर काल की तरह मंडराने लगे। जहां सड़कों पर लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे थे वहीं किसानों की तैयार खड़ी फसल बर्बाद हो रही थी।
जिसको देखते हुए योगी सरकार ने नववर्ष पर हर न्याय पंचायत व ग्राम सभा स्तर पर गौशालाओं का निर्माण करने का फरमान भी जारी किया। आदेश जारी होते ही आनन-फानन में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों ने संबंधित उप जिलाधिकारियों एवं विकास खंड के अफसरों को आदेशित किया कि वह हर ग्राम सभाओं से लेकर न्याय पंचायतों में गौशालाओं का निर्माण सुनिश्चित करें, जिससे सड़कों से लेकर किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे गौवंशो को पकड़ कर उसमें रखा जा सके, जिससे किसानों को राहत मिल सके।

मुख्यमंत्री योगी का सख्त आदेश था कि जनवरी माह के अंदर ही घूम रहे आवारा गोवंशो को गौशालाओं का निर्माण कराकर उनमें बंद किया जाए। तथा उनके चारे और पानी की उचित व्यवस्था की जाए और इस काम को विकासखंड के द्वारा संचालित होकर ग्राम पंचायत सचिव और प्रधानों को मूल रूप देना था।

किंतु अब यही से शुरू हुई पुरानी सरकारों से व्याप्त भ्रष्टाचार व हिला हवाली की कहानी पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निर्माण तो कुछ हद तक सचिव और प्रधानों द्वारा कराया गया जिसमें बनवाने में मनमाने तरीके से सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए गबन किया गया।

अब इसके संचालन में संबंधित अधिकारियों द्वारा जो लचर रवैया अपनाया गया उससे या तो गोवंश गौशालाओं में ही दम तोड़ने लगे या फिर बाहर निकल कर फिर पहले की तरह किसानों की फसलों पर काल बनकर टूटने लगे।
एक ओर तो किसानों की समस्या ज्यों का त्यों बनी रही वहीं दूसरी ओर जो भी गोवंश आधी अधूरी गौशालाओं में बंद थे वे भीषण गर्मी में चारे- पानी और छाया के बिना तड़प तड़प कर मरने लगे। और कमोबेश यही हाल पूरे प्रदेश नहीं होने लगा जिससे चारों तरफ किसानों से लेकर आम जनमानस में हाहाकार मच गया।

प्रदेश की इन गौशालाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर किसानमंच के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी द्वारा कई बार संबंधित विभिन्न विभागों को शिकायतें भेजी गई अध्यक्ष द्वारा स्वयं प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जाकर गौशालाओं की अनियमितताओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा गया किंतु कार्रवाई के नाम पर केवल कोरे आश्वासन ही मिलते रहे।

शिकायतों की अनदेखी एवं प्रदेश में मचे हाहाकार को देखते हुए किसानमंच के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा माननीय न्यायालय में 28 जून 2019 को एक पीआईएल गौशालाओं के भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर दाखिल की गई, जिस को संज्ञान में लेते हुए माननीय न्यायालय ने 31 जून 2019 को सरकार को आदेश दिया कि वह अपना जवाब अगले 6 हफ्तों के अंदर दाखिल करें। जिसकी अगली सुनवाई 15 जुलाई को होनी है।

इधर गौशालाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए दाखिल की गई पीआईएल को लेकर प्रदेश के पशु माफियाओं से लेकर पशु तस्कर व दबंग किस्म के ग्राम प्रधानों की नजरों में किसानमंच के प्रदेश अध्यक्ष का खटकना लाजमी हो गया। उन्हें यह हजम नहीं हो रहा था कि उनके द्वारा की जा रही सरकारी धन के बंदरबांट को कोई उजागर करें व कोई उसका हिसाब किताब ले। वे पीआईएल दाखिल करने के बाद से लगातार किसान नेता को धमकियां देने लगे कि वह दाखिल की गई अपनी पीआईएल को वापस ले ले नहीं तो उन्हें इसके खामियाजे स्वरूप अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। आए दिन किसान नेता को धमकी भरे फोन आ रहे हैं, व भाँति-भाँति प्रकार से धमकियां मिल रही हैं।

जिसको लेकर किसानमंच के अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी रिंकू ने बुधवार को जिलाधिकारी से अपनी सुरक्षा को लेकर गुहार लगाई है उनका कहना है कि इसके पूर्व में भी उन पर अनैतिक रूप से मुकदमे लगवाने से लेकर जान से मारने की कई बार कोशिश की जा चुकी है, जिसको देखते हुए माननीय न्यायालय ने उन्हें एक सुरक्षा गार्ड भी मुहैया करा रखा है,किन्तु श्री तिवारी ने जिलाधीश से मांग की है कि प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण योजना गौशाला के भ्रष्टाचार को उजागर करने को लेकर उनकी जान पर जो संकट बन आया है उसको संज्ञान में लेते हुए उन्हें उचित और पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए।