नहरों में पानी नहीं तालाब रहे सूख पशुओं सहित किसान बेहाल

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लखनऊ । यूं तो यह क्षेत्र राजधानी से सटा है कहने को राजधानी होने के नाते सभी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। किंतु जमीनी हकीकत इसके बहुत विपरीत है इसकी वास्तविकता क्षेत्र का हाल देखने के बाद ही पता चलती है।
हम बात कर रहे हैं सरोजिनी नगर विकासखंड की जिसमें पडने वाली मुख्य नहर में से मोहान रजबहा भी एक मुख्य नहर है जिसका नाम तो रजबहा है लेकिन इसमें पानी वर्ष के कुछ गिने-चुने दिनों में ही देखने को मिलता है।

इस समय गर्मी का मौसम है पशु पक्षियों जानवरों सहित किसानों को भी इस मौसम में अधिक पानी की आवश्यकता होती है बागवानी की फसलों से लेकर इस समय छोटे-मोटे रोजगार एवं धान की बेढ का सीजन है किंतु नहरों में पानी नहीं है। मोहन रजबहा व इससे निकलने वाली छोटी-छोटी माईनरों से विकास खंड के दर्जनों गांव जैसे कि ऐन, रामदासपुर, सहजनपुर, चक, नारायणपुर, भटगांव आदि किसानों की फसलों की सिंचाई होती है परंतु जब मुख्य नहर में ही पानी नहीं है तो इससे निकलने वाले माईनरों का क्या होगा। जिसके कारण गेहूं की फसल कटने के बाद सभी किसानों के खेत सूख रहे हैं व जो भी किसान नहरों के भरोसे कुछ थोड़ा बहुत रोजगार कर भी लिए थे उनकी फसलें खत्म होने की कगार पर हैं।

छुट्टा जानवर जो अभी तक फसलों से अपना पेट भर रहे थे फसलों के कट जाने पर व इस भीषण गर्मी व सूखे के मौसम में भूख और प्यास से दर-दर भटकने को व मरने को विवश हैं।