पुलवामा में शहीद हुए जवानो को मिलेगी पेंशन, अफवाहों पर न दें ध्‍यान

111
newyearwish

नई दिल्‍ली। सोशल मीडिया पर 14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले में 40 केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की मौत के बाद से उनके और उनके परिवार वालों के प्रति सहानुभूति का सिलसिला जारी है।
देशवासियों ने टीवी और सोशल मीडिया पर ‘शहीदों’ और उनके परिवारों के लिए हमदर्दी और चिंताएं जताई हैं।
लेकिन अधिकतर प्रतिक्रियाएं ग़लत सूचनाओं पर आधारित हैं।
इनमें से अधिकतर लोगों ने जवानों की पेंशन को लेकर चिंता जताई है।

बहुत से लोगों ने ट्विटर पर दावा किया है कि पुलवामा पीड़ित के 75 प्रतिशत परिवारों को पेंशन नहीं मिलेगी क्यूंकि वो 1972 की पुरानी पेंशन योजना के तहत कवर नहीं होते हैं।
उन्होंने केंद्रीय सरकार से आग्रह किया है कि मारे गए जवानों के परिवारों को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाने के लिए प्रयास किया जाए।

सीआरपीएफ़ और अन्य केंद्रीय पुलिस बल 1972 की केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस) पेंशन योजना के तहत आते हैं। लेकिन 2004 के बाद सुरक्षा बल में शामिल होने वालों को किसी भी पेंशन योजना के तहत कवर नहीं किया जाता है।

सीआरपीएफ़ अधिकारियों के अनुसार पुलवामा हमले में मारे गए 40 में से 23 जवान 2004 के बाद फ़ोर्स में शामिल हुए थे। यही वजह है कि ट्विटर पर कई लोगों को डर है कि “शहीदों” के परिवारों को पेंशन नहीं मिलेगी।
लेकिन, सीआरपीएफ़ के मुताबिक़ सभी 40 जवानों के परिवारों को पेंशन मिलेगी,
चाहे वो सुरक्षा बल में 2004 के बाद ही क्यों न शामिल हुए हों।

इसकी पुष्टि करते हुए, सीआरपीएफ़ के प्रवक्ता और डीआईजी
मोज़ेज़ धीनाकरन ने कहा, “उनकी शामिल होने की तारीखों के बावजूद, सभी शहीदों के परिवारों को “लिबरलाइज्ड पेंशन अवार्ड्स” दिया जाएगा जो आखिरी वेतन का 100% है और उसमें डीए भी जुड़ा है।”

सीआरपीएफ़ प्रवक्ता का कहना है कि यह पेंशन ऑफर अर्धसैनिक बलों के उन सभी जवानों के परिवारों पर लागू होता है जो 2004 से पहले या बाद में सेवा में शामिल हुए थे, देश में कहीं भी हुई कार्रवाई में मारे गए थे।

एसबीआई भी पैसे देगा

सोशल पर कई लोगों ने लिखा था कि पुलवामा में मारे गए “शहीदों” के परिवारों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) पैसे देगा। ये खबर पक्की है कि एसबीआई हर उस शहीद के परिवार को 30 लाख रुपये देगी जो अर्धसैनिक सेवा पैकेज के साथ पंजीकृत है।
सीआरपीएफ का कहना है कि लगभग सभी अर्धसैनिक इस पैकेज का हिस्सा हैं।
यह जीवन बीमा की तरह है।

‘शहीदों’ के परिवारों के लिए वित्तीय पैकेजों की एक सूची:

केंद्र सरकार द्वारा

हर शहीद के परिवार को 35 लाख रुपये

एसबीआई से 30 लाख रुपये

विधवा, माता-पिता या बच्चों को उदार पेंशन योजना के माध्यम से मासिक वेतन प्राप्त होगा।

सुरक्षा बलों की समूह बीमा योजनाओं के माध्यम से पैसे दिए जाएंगे। करोड़ रुपये (दिल्ली सरकार अब तक एक शहीद के परिवार को ), 50 लाख रुपये (हरियाणा सरकार), अन्य राज्य सरकारों द्वारा 10 लाख से 20-30 लाख रुपये

राज्य सरकारें परिजनों को ज़मीन के प्लॉट, बच्चों के लिए शिक्षा, औद्योगिक शेड और अन्य लाभ भी दे सकती हैं।

मरने वाले जवान शहीद हैं या नहीं

नेता, पत्रकार और आम नागरिक उन्हें सम्मान देने के लिए शहीद कह सकते हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर, वे शहीद नहीं हैं।

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट में पुलवामा में मारे गए लोगों को शहीद बताया गया है।
हमले के एक हफ्ते बाद उन्होंने ट्वीट किया “बहादुर शहीद हुए हैं।
उनके परिवार परेशान हैं।
चालीस जवान अपनी जान दे देते हैं लेकिन “शहीद” के दर्जे से वंचित रह जाते हैं।”

2017 में पीएम मोदी सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग से कहा था कि सेना या पुलिस बल में ‘शहीद’ नहीं है।
अर्धसैनिक बल या नहीं?

मीडिया और जनता में आम तौर पर एक गलत धारणा है कि सीआरपीएफ और बीएसएफ अर्धसैनिक बल हैं। लेकिन, आधिकारिक तौर पर वे गृह मंत्रालय के तहत सात पुलिस बलों का हिस्सा हैं।

उन्हें आम तौर पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के रूप में जाना जाता है। वे सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल हैं।