पशु आश्रय केंद्र बनाने में हो रही हीलाहवाली के चलते आवारा पशु किसानों के नुकसान के साथ-साथ बड़ी दुर्घटनाओं को दे रहे दावत

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श्रीनिवास सिंह मोनू

लखनऊ: प्रदेश में छुट्टा जानवरों के बढ़ते प्रभाव से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने पिछले माह ही आदेश दिया था कि हर न्याय पंचायतों के साथ साथ ग्राम पंचायतों में मौजूद चारागाह की जमीनों पर पशु आश्रय केंद्र बनाकर कर घूम रहे आवारा जानवरों को पकड़ कर तुरंत उनमें बंद किया जाए व उनके चारा पानी की व्यवस्था की जाए। करवाई में निरंतर लेटलतीफी के चलते जिला अधिकारी को भी संबंधित अफसरों को फटकारना पड़ा परंतु क्या मजाल जो कि विकासखंड के अधिकारियों से लेकर ग्राम प्रधानों तक के कानों में जू तक रेंगती कहीं-कहीं जहां आश्रय स्थल बन रहे हैं वहां उनके के बनने की रफ्तार इतनी धीमी है कि शायद ही कई महीनों में पूरा हो जाएं जिसके चलते आवारा जानवरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है और वह लगातार बड़ी बड़ी दुर्घटनाओं को दावत भी दे रहे हैं । अभी कुछ दिनों पूर्व ही लखनऊ कानपुर रेलखंड के हरौनी रेलवे स्टेशन पर लगभग आधा दर्जन गोवंशो के कटने की घटना घटी थी परंतु फिर भी ग्राम प्रधानों को व विकासखंड के अधिकारियों को स्वास्थ्य केंद्र बनाने की कोई जल्दी नहीं है। जिसके चलते शुक्रवार दोपहर हरौनी स्टेशन के आउटर पर फिर 4 गोवंश एक ट्रेन की चपेट में आ गए जिससे उनकी बड़ी ही दर्दनाक तरीके से मौत हो गई एक जानवर तो बड़ी दूर तक ट्रेन में फंसकर दूर तक घसीटता चला गया। वहीं इनके शवों को अगले दिन तक भी मौके से नहीं हटाए जाने के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई। जिसके कारण भयानक बीमारियों का खतरा भी फैल रहा है वहीं क्षेत्रीय जनता के अनुसार यह जानवर अगर इसी प्रकार रेलवे लाइन पर दुर्घटना का शिकार होते रहे तो संभव है कि कभी कोई पैसेंजर ट्रेन भी दुर्घटना का शिकार हो जाए जिससे कि बड़ी दुर्घटना भी घटित हो सकती है।