आखिर कब रुकेगा सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी का खेल

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श्रीनिवास सिंह मोनू
लखनऊ: देश और प्रदेश की सरकारें भ्रष्टाचार मुक्त करने के अपने वादे के साथ सत्ता में आई थी। क्योंकि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के द्वारा आम जनमानस इतना परेशान हुआ था की वह सरकार बदलने को लेकर संकल्पित हो चुका था। इसी के परिणाम स्वरूप देश व प्रदेश में भाजपा की सरकार को सत्ता मिली जो कि अपने भ्रष्टाचार मुक्त करने के दावे के प्रति अभी तक संकल्पित भी नजर आती रही है।
किंतु सरकारी विभागों में बैठे कुछ अफसर व कर्मचारी भ्रष्टाचार में इतने आकंठ तक डूबे हैं कि उनकी आदत नहीं छूट रही है।जो कि लगातार सरकार को बदनाम कर रहे हैं।

आज हम बात कर रहे हैं राजधानी के सरोजनी नगर विकास खंड की जिसके सैकड़ों ग्राम पंचायतों में प्रकाश के लिए बिजली के खंभों पर 25 वाट एल ई डी स्ट्रीट लाइट विकास खंड के माध्यम से ग्राम प्रधानों के द्वारा लगवाई गई थी। जिनके विकास खंड के सरकारी कागजों पर पृति लाइट 4300 रुपये की दर से बिल स्वीकृत किए गए थे। जो कि लगने के मात्र कुछ ही महीनों में आधे से अधिक खराब भी हो गई। वहीं इसी प्रकार की स्ट्रीट लाइटों की बाजार में कीमत 1000 से 1500 रुपए की बीच ही है। जबकि उनकी 2 वर्ष की वारंटी भी होती है। सैकड़ों गांवों में हजारों की संख्या में लगी महंगी स्ट्रीट लाइटों को खराब होने के बाद अब कोई देखने वाला भी नहीं है।
इससे साफ प्रतीत होता है कि इन स्ट्रीट लाइटों की कीमतों में ग्राम प्रधानों से लेकर विकासखंड के अधिकारियों ने जमकर मुनाफा खोरी का खेल खेला है। और मोटी रकम अंदर करने के बाद लाइटों से किनारा कर लिया है। जिस कारण विकासखंड के समूचे गांव आज फिर अंधकार में डूबे रहते हैं। अगर सरकार द्वारा इसकी निष्पक्षता से जांच कराई जाए तो अपने आप दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।