मुख्यमंत्री की जुबान नहीं समझते अधिकारी आदेशों को ताक पर रखकर करते हैं मनमाने तरीके से कार्य

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ब्यूरो चीफ श्रीनिवास सिंह मोनू समाचार वाला                  डॉट कॉम न्यूज पोर्टल

लखनऊ: देश में एनडीए सरकार बनने के बाद जब पशु वध शालाओं में गोवंश के कटान पर पाबंदी लगाई गई थी तब शायद सरकार को भी इस बात का भान नहीं रहा होगा, कि आने वाले समय में जनता को इस कानून के द्वारा दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।

किंतु जैसे जैसे समय बीतता गया वर्ष 2017 में जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी जिसके द्वारा गोवंश के कटान पर और भी शक्ति के साथ रोक लगाने के प्रयास किए गए।
जिसके दुष्परिणाम यह हुए की पूरे प्रदेश में सड़क से लेकर किसानों के खेत खलिहान तक में गोवंश की जैसे बाढ़ सी आ गई हो। नतीजतन सड़क पर चलने वाले राहगीर दुर्घटना का शिकार हुए। इसके अलावा किसानों को अपनी फसल का रखरखाव करना मुश्किल हो गया।20190109_182732

वहीं सरकार को जब अपने कठोर फैसले के दुष्परिणामों के बारे में ज्ञात हुआ तो सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष के प्रारंभ में प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए यह तय किया की प्रदेश भर में सड़कों से लेकर किसानों के खेत और खलिहान में घूम रहे छुट्टा जानवरों को आने वाली 10 जनवरी तक पूर्ण रूप से पकड़ कर नजदीक में बनी गौशालाओं में बंद किया जाएगा और इसके साथ ही उनके मालिकों को चिन्हित करते हुए दंडित भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा इस आदेश को कड़ाई से पालन करने को भी कहा गया था।

परंतु मुख्यमंत्री योगी जी के इस फरमान की राजधानी के जिलाधिकारी को कितनी फिक्र है यह विकासखंड सरोजनी नगर के इलाके में घूम रहे छुट्टा जानवरों को देखकर आसानी से मालूम हो जाता है। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई समयसीमा खत्म होने को है, इसके उपरांत कहीं पर भी जानवरों का पकड़ना प्रारंभ नहीं हो सका है ना ही किसी ग्राम पंचायत में पशु आश्रय केंद्र के बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों के हीला हवाली के कारण लगातार सड़कों से लेकर किसानों की फसलों पर छुट्टा जानवर काल बनकर घूम रहे हैं।20190109_182812

और अब तो किसानों से बात करने पर उनका दर्द साफ तौर पर झलक आता है उनका तो यहां तक कहना रहता है कि इन छुट्टा जानवरों से राहत दिलाना अब इस सरकार के बस की बात नहीं। अब उन्हें इसके लिए आने वाली दूसरी सरकारों से ही आस लगाना होगा।