नहरे पड़ी सूखी निजी नलकूपों से मनमाने दर पर पानी लेने को मजबूर अन्नदाता

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श्रीनिवास सिंह मोनू
लखनऊ। किसान हितैषी सरकार के तमाम दावे तब धरे के धरे रह जाते हैं जब किसान को उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी ना हो सके। सरकार के द्वारा वैसे तो किसानों के लिए तमाम तरह की योजनाओं के दावे किए जाते हैं, परंतु किसानों को समय पर उनकी जरूरतों को पूरा करने वाले साधन उपलब्ध कराना हमेशा सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है, चाहे वह फसल कटने के समय पर फसल का उचित रखरखाव हो या उसका उचित मूल्य निर्धारित करते हुए किसानों को उचित मूल्य मिले यह निश्चित करना चाहे बुवाई के समय पर खाद की आपूर्ति या फसल की सिंचाई के समय पर मौजूदा नहरों में पानी की व्यवस्था करना।

आज हम बात कर रहे हैं सरोजनी नगर क्षेत्र की विभिन्न नहरों जैसे मोहान रजबहा, अमौसी रजबहा, गहरु रजबहा व इन से निकलने वाले दर्जनों माइनरो की जिनके द्वारा इलाके के सैकड़ों गांव के किसानों को उनकी फसलों में पानी देने के लिए सुविधा हो जाया करती थी।

किंतु दुर्भाग्यवश इन सभी मुख्य नहरों में लगभग साल भर से पानी ही नहीं छोड़ा गया, जिसकी वजह से क्षेत्र के किसान खेतों के आस पास स्थापित किए गए निजी नलकूपों से मनमाने दर पर पानी लेने को मजबूर हैं। इसके अलावा कहीं कहीं पर तो मायनरों की सफाई करते हुए सरकारी धन के बंदरबांट का भी खेल बखूबी खेला जा चुका है।

किसानों को नहरों का पानी ना उपलब्ध कराते हुए नलकूप के महंगे पानी द्वारा सिंचाई करने पर फसलों में आने वाली लागत अपने आप बढ़ जाए करती है, जिससे कि सरकार का किसानों को उनकी लागत का दोगुना देने का वादा भी धरा का धरा रह जाता है।