सिद्धार्थनगर में कोटेदार बड़े पैमाने पर कर रहे सरकारी राशन की कालाबाजारी

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सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर में गरीबो को प्रतिमाह मिलने वाले खाद्यान्न पर कोटेदार व जिम्मेदार
अधिकारियो ने कुंडली मार दी है। जनपद में यह खेल विगत कई वर्षों से निर्बाध चल रहा है।
सूबे की सरकार बदली ,मुखिया बदला, नहीं बदली तो जनपद सिद्धार्थ नगर के गरीब जनता की किस्मत।
इस जनपद में गल्ला माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि पूरे
जनपद में गरीबों को प्रतिमाह वितरित किए जाने वाला खाद्यान्न हर
दूसरे महीने डंके की चोट पर बांटा जाता है।

किसी गरीब ने ग्रामप्रधान या कोटेदार से इस बाबत मौखिक शिकायत भी कर दी
तो या उसे राशन नही मिलेगा या अपशब्दों के साथ सख्त चेतावनी दी जाती है।
जिससे अन्य गरीब भी उससे सबक लेते हुए क्षेत्रीय या जनपद स्तर पर शिकायत करने
की हिम्मत नहीं जुटा पाते। जिले स्तर पर यह खाद्यान्न घोटाला
विगत कई वर्षों से धड़ल्ले से चल रहा है।

आलाधिकारियों को पहुंचता है हिस्‍सा

जनपद में इतने व्यापक पैमाने पर राशन का काला कारोबार अनवरत जारी है।
वही ब्लाक खेसरहा के दुबई गाँव के ऐतिहासिक कोटेदार राधेश्याम चौधरी निर्भीकता से
पत्रकारों से बात करते हुए बताते हैं कि हम राशन बेचकर सभी जिम्मेदार
अधिकारियों को हिस्सा पहुचाते हैं।
सोचने वाली बात यह है कि जिस विभाग में इतना बड़ा घोटाला हो रहा है
वह विभाग खुद सूबे के मुख्यमंत्री के पास है। गामीणों का कहना है कि
इस जनपद का तो यही हाल है।
यहां हम गरीबों का सुनने वाला कोई नही है।
सरकार चाहे जो भी हो हम इन गरीबों पर ध्यान देने वाला कोई नही है।

लाभार्थियों का कहना है कि एक महीने राशन दिया जाता है और दूसरे महीने उसे
अधिकारियों की मिलीभगत से बेच दिया जाता है, इस जनपद का यह हाल जमाने से चला आ रहा है।
यहां पर तो भाजपा का नारा सबका साथ सबका विकास झूठा साबित हो रहा है।

योगी सरकार अपने जिम्मेदार अधिकारियों पर लगाम  कसने में नाकाम साबित हो रही हैं।
अब देखना यह कि सूबे के मुखिया अपने ही विभाग का दामन पाकसाफ रख पाते हैं या नही?