विवेक तिवारी हत्याकांड : सीएम योगी को चुकानी होगी बड़ी किमत, दाग कैसे धुलेंगे

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लखनऊ। विवेक तिवारी हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश पुलिस के
उत्‍पीड़न की पोल खोलकर रख दी है।
विवेक तिवारी हत्‍याकांड से प्रदेश में कानून का राज होने
का दम भर रही योगी सरकार बैक फुट पर नजर आ रही है।
सरकार ने आननफानन में मामले को शांत करने के लिए
एसआईटी के गठन और ज्यूडिशियल इंक्वायरी के जरिए
निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है।
भारी दबाव के बीच मृतक विवेक की पत्नी को मुआवजे और
सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा की गई है।

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इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत को भी झकझोर कर रख दिया है।
प्रमुख विपक्षी दल लगातार योगी सरकार पर हमलावर हैं।
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि लखनऊ की घटना ने
सरकार की छवि को तगड़ी चोट पहुंचाई है।
अगर बीजेपी सरकार ने इस घटना से सबक नहीं लिया तो
चुनावों में उसे भारी कीमत अदा करनी पड़ सकती है।

ट्वीट में अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी सरकार को
असंवेदनशील रवैया छोड़कर तत्काल मृतक की पत्नी के लिए
सरकारी नौकरी व बच्चियों के भविष्य के लिए 5 करोड़ की
आर्थिक मदद की लिखित घोषणा करनी चाहिए।
परिवार की ज़िम्मेदारी क्या होती है, ये बात परिवारवाले ही जानते हैं।
दुख की इस घड़ी में हम शोकाकुल परिवार के साथ खड़े हैं।

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ट्वीट में राजबब्बर ने लिखा कि योगीजी मुख्यमंत्री भी हैं
और राज्य के गृहमंत्री भी। लेकिन निर्दोष विवेक तिवारी के
परिजनों के लिए उन्होंने अपनी यात्राएं रद्द नहीं कीं।
हृदयहीनता के अपने चरम पर है योगी-मोदी राज।
यूपी कांग्रेस ने हज़रतगंज में कैंडिल मार्च किया।
विवेक को न्याय दिलाना अब सबसे अहम कार्य है।

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वरिष्ठ पत्रकार विजय शर्मा कहते हैं कि लखनऊ का
शूटआउट पुलिस उत्पीड़न की रोज होने वाली घटनाओं का चरम है।
सच ये है कि आम आदमी रोज पुलिस के उत्पीड़न का शिकार होता है।

सभी को पता है कि भ्रष्टाचार पुलिस में किस कदर लिप्त है?
लेकिन विरोध के स्वर तभी सुनाई देते हैं, जब इस तरह की घटनाएं आती हैं।
उन्होंने कहा कि जनता को भी अब जागरूक होना पड़ेगा।
उसे रोज-रोज होने वाले पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ अपनी
आवाज बुलंद करनी होगी।

‘100 रुपये देकर निकल लो’, वाली सोच को छोड़ना होगा,
क्योंकि गोलीकांड इन्हीं छोटे-छोटे पुलिस उत्पीड़न का भयावह रूप है।

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वहीं वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि इस घटना ने
पुलिस की बर्बरता और निरंकुशता को उजागर किया है।
संदेह के आधार पर किसी को गोली नहीं मार सकते।
उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी सरकार के लिए अहम मुद्दा होता है।

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लेकिन ये घटना बता रही है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था में
वैसा सुधार नहीं हो रहा है, जिसकी उम्मीद बीजेपी के सत्ता में
आने के बाद की जा रही थी।
निरंकुश पुलिस कभी भी कानून व्यवस्था सुधार नहीं सकती।

सरकार को इस मामले में कड़ी कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ
कोर्ट में भी उचित पैरवी कर उन्हें सजा दिलानी होगी।
इस घटना से सरकार की छवि को काफी नुकसान हुआ है।

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सुरेश बहादुर कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ये देखना होगा कि
उनकी कानून व्यवस्था के मामले में गंभीरता और निर्देशों
का पालन अफसर जमीन पर कैसे कर रहे हैं।