रहिमनागर पाडियना के गोड़वा में समस्‍याओ का अंबार, अपात्रों को मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

278

लखनऊ। जल ही जीवन है हम सब जानते हैं इंसान खाने के बिना तो रह सकता है मगर पानी के बिना रहना मुस्किल है। सरकार सबको साफ पानी मुहैया कराने के लिए निरंतर प्रायास कर रही है।
मगर सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने वाले कोई और नहीं बल्कि
सरकार में ही बैठे कुछ लोगा हैं जो नहीं चाहत कि सरकार की योजनओं का लाभ सबको मिले।

ताजा मामला सरोजनीनगर के रहिमनागर पांडियना के ग्राम गोड़वा का है।
यहां पर रामबाबू रावत व कैलाश रावत के घर के सामने लगा हैण्डपम्प लगभग दो वर्ष से खराब पड़ा है
जिसकी शिकायत गाँव के लोगो ने ग्राम प्रधान से कई बार की मगर शिकायतों के बाद भी ग्राम प्रधान ने इस हैण्डपम्प की शुध नही ली, गर्मी के साथ ही पेय जल की समस्या बढ़ने लगी है।
मोहल्ले वालों को इधर उधर के हैण्डपम्प से पानी लाना उनकी मजबूरी बन गया है।

सरकार द्वारा गाँवो के हैण्डपम्प को रिबोर करने व मरम्मत करने का पैसा ग्राम प्रधान निधि में दिया जाता है।
सोचने की बात यह है कि सरकारी पैसा कहाँ खर्च होता है।
जो कि हैंडपम्पों की मरम्मत नही हो पाती या सिर्फ कागज पे ही खाना पूर्ती करके भेज दिया जाता है।
जिस हैण्डपम्प की बात हो रही है।
सर्प के काटने पर ब्यक्ति का विष उतारने का कार्य उसी हैण्डपम्प के पास ही होता है।
दूर दूर से लोग आते है। विष उतारने के लिए पानी की आवश्यकता होती है।
पानी उसी हैण्डपम्प से लिया जाता है।

स्वच्छ भारत मिशन शौचालय योजना में हो रही धांधली

सरकार के द्वारा गाँव मे प्रत्येक गरीब ब्यक्ति को शौचालय मिलने का प्रवधान है। लेकिन ग्राम प्रधान द्वारा बनायी गयी सूची के आधार पर ही शौचालय वितरण किये जा रहे है। पात्र गरीबों को अभी तक शौचालय का लाभ नही मिल पा रहा है।

नालियों में भरा कचरा बीमारियों को दे रहा दवात

ग्राम गोड़वा में लगभग पाँच माह से सफाई कर्मी नही आ रहा है।
सफाई कर्मी का काम केवल ग्राम प्रधान के घर तक ही सीमीत है।

सफाई कर्मी के न आने से नालियों में कचरा भरा रहता है।
जिससे संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है।
इसकी सूचना ग्राम प्रधान व ग्राम विकाश अधिकारी को भी सूचना कई बार दी गयी।
लेकिन अभी तक नाली साफ नही हुयी है।

नालियों पे नही रखे गए पत्थर

उत्तर प्रदेश सरकार नालियों को ढ़कने के लिए पत्थर की व्यवस्था है।
लेकिन जो पत्थर आए है वह मानक से बहुत पतले है।
जो कि जरा सी टक्कर लगने से ही टूट जाता है।
कुछ नालियों पे पत्थर रखे गए है।
बाकी सब खुली पड़ी है।
ग्राम विकास अधिकारी से लेकर बीडीओ तक इन शिकायतों पर ध्यान नही दे रहे है।