जिम्‍मेदारों की उपेक्षा से बदहाल रहीमनगर पड़ियाना के महेन्द गांव का पंचायत भवन व विद्यालय

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लखनऊ। सरकार ग्रामीणों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए करोड़ो रुपए खर्च करके गाँव में पंचायत भवन बनवाती है।
मगर जिम्‍मेदारों की उदासीनता से ये पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो रहे हैं।
अब ज्‍यादातर पंचायत भवन का इस्तेमाल आवारा मवेशी कर रहे है।

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हम बात कर रहे हैं सरोजनीनगर ब्लाक के ग्राम सभा रहीमनगर पड़ियाना के ग्राम महेन्द की जहांपर पंचायत भवन खंडार में तब्दील हो गया है।
लगभग 12 वर्ष पहले इस पंचायत भवन का निर्माण हुआ था। देखरेख न होने के कारण खंडहर में तब्दील हो गया है।

इस पंचायत भवन में ग्राम सभा की बैठकों के अलावा समय-समय पर होने वाले जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
थोड़ी सी बारिश हो जाने से पंचायत भवन मेंपास पानी भर जाता है।जिससे पंचायत भवन में जाना मुश्किल हो जाता है।
पंचायत भवन की बाउंड्री व दरवाजे टूट चुके है।
जिससे मवेशियों के बैठने का अडडा बन गया है।

ग्राम प्रधान की मेहरबानी को तरस रहा प्राथमिक विद्यालय महेंद

ग्राम प्रधान द्वारा इस विद्यालय में टाइल्स तो लगाए गए।
लेकिन सबसे जरूरी काम शौचालय का था जो कि नही कराया गया।
शौचालय की दशा दयनीय है जिसके कारण विद्यालय के समस्त छात्र व अध्यापिकाओं को बाहर जाना पड़ता है।
जहाँ सर्प, कीड़े, मवेशियों आदि से जान का खतरा बना रहता है।

नही करायी गयी विद्यालय की बाउंड्री

प्रत्येक विद्यालय में बाउंड्री का होना बहुत जरूरी है।
जिससे विद्यालय प्रांगण में कोई अन्य ब्यक्ति, मवेशी न आएं, लेकिन ग्राम महेन्द के विद्यालय में बाउंड्री, गेट, कुछ भी नही है।
मगर कक्षाएं चल रही हैं।
मवेशियों के झुण्ड विद्यालय प्रंगण में आकर बैठ जाते है जिससे छात्रों,
अध्यापिकाओं को हलकान होना पड़ता है।

रोड-विद्यालय से महज 100 फिट की दूरी नही लगा खडंजा

विद्यालय व डामर रोड में महज 100 फिट की दूरी लेकिन ग्राम प्रधान के द्वारा आज तक उतने रास्ते मे खडंजा नही लगाया गया।
छात्रों/अध्यापिकाओं को उसी पानी के रास्ते से गुजर केविद्यालय जाना पड़ता है।
सोचने की बात यह है कि अच्छायपात्र योजना की गाड़ी भी
विद्यालय तक नही पहुँचती डामर रोड पे ही भोजन उतारती है।
लेकिन ग्राम प्रधान द्वारा आज तक इन समस्याओं पर कोई ध्यान नही दिया गया है।