बिजली न आने से आम जनमानस समेत किसान हुए परेशान

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श्रीनिवास सिंह ‘मोनू सिंह’

लखनऊ। सरकार शहरों में चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे अधिकतम समय सीमा तक विधुत की आपूर्ति करने के तमाम दावे कर रही है।
जनप्रतिनिधि समय-समय पर अपनी सभाओं में इसका श्रेय लेकर अपनी पीठ भी थपथपा रहे हैं।
परंतु हकीकत क्या है, यह तो धरातल पर आ कर ही पता लगता है।

गहरू उपकेंद्र

ताजा मामला राजधानी के विद्युत वितरण खंड शेष प्रथम के गहरू उपकेंद्र से पोषित होने वाले हरौनी फीडर समेत सभी फीडरों का है।
जहाँ की बिजली बीते गुरुवार शाम को बंद होने के लगभग 12 घंटे के बाद ही चालू हो पाई।
जिससे भीषण गर्मी में तमाम ग्रामवासी तो परेशान हुए ही साथ ही
धान की रोपाई का मौसम होने के कारण किसान भी परेशान हुए व लाइट
आने का इंतजार करते रहे। बात अगर शहरी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति की लाइनों
की जाए तो वहां पर तो तार व खंभे नियमित रूप से बदले जाते हैं।

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परंतु ग्रामीण इलाकों में जिन खंभों व तारों के सहारे विद्युत आपूर्ति की जाती है
वह कई वर्ष पुराने ही लगे हैं जोकि बहुत ही जर्जर व जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं।
तारों की हालत तो यह है कि एक ही खंबे के बीच में  कई टुकड़ों को जोड़कर सप्लाई जारी की जाती है।

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परंतु विद्युत विभाग इन खंभों व तारों को बदलने की ओर कतई ध्यान नहीं दे रहा।
किन्तु समय-समय पर उपभोक्ताओं से वसूली व उनको विद्युत कनेक्शन का
विच्छेदन करने की धमकी अवश्य देता रहता है।
इस संबंध में जब उपखंड अधिकारी से बात की गई
तो उन्होंने बताया कि उपखंड में आने वाली 33,000 केवी की सप्लाई में खराबी
आ जाने के कारण उपखंड से पोषित होने वाले फीडरों की आपूर्ति में बाधा हुई।