ग्राम समाज की जमीनो पर अवैध कब्‍जे का कौन है जिम्‍मेदार, किसकी है जवाबदेही ?   

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श्री निवास सिंह “मोनू सिंह”

लखनऊ। प्रदेश में भू माफियाओं को काबू में करने के लिए सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने अपनी निगरानी में एंटी भूमाफिया पोर्टल की शुरुआत की। कुछ दिनों तक इस पोर्टल के माध्‍यम से कुछ लोगों की समस्‍याओं का निवारण भी हुआ मगर जैसा हर सरकारी अभियान का हाल होता है वैसा ही कुछ इस अभियान का भी हुआ। भ्रष्‍टाचार की वैतरणी में डुबकी लगाने वाले कुछ भ्रष्‍ट अफसरों को यह सरकारी अभियान रास नहीं आ रहा है।

हम बात कर रहे हैं गांवो में पड़ ग्राम समाज की जमीनो पर अवैध निर्माण की। गांवो में चारागाह हो या गांवा का पानी इकट्ठा होने वाले तालाब, खेलकूद के मैदान, स्कूल, अस्पताल ज्‍यादातर गांवों के बीच में घरों से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने वाले तालाबों के अवशेष भी नहीं बचे हैं। ज्‍यादातर गांवो में तालाब की जगह पर अवैध निर्माण हो चुके हैं।

गांवो में मौजूद दबंग प्रवृत्ति के लोगों ने ग्राम प्रधान व लेखपाल की मिलीभगत से खाली पड़ी ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा जमा लिया। परिणाम स्वरूप सरकार द्वारा सुनियोजित विकास की गति रुक सी गई। वैसे तो कागजों पर इन जमीनों का मालिक ग्राम प्रधान, लेखपाल से लेकर तहसील स्तर के अधिकारी बताए जाते हैं। परंतु अब इसे दबंगों का प्रभाव कहें या वोटबैंक की राजनीति की।

सभी जमीनों पर कब्जा करने के बावजूद भी उन दबंगों का बाल बांका भी नहीं हो पाता। वह सरकारी जमीन उनके कब्जे में हो जाती है। सरकार की महत्वपूर्ण महत्वकांक्षी योजना भूमिहीनों को आवास व कुछ जमीन खेती योग्य देकर उन्हें सहारा प्रदान किया जाए, यह भी केवल कागजों तक ही सीमित रह जाती है।

इस विषय में एक तो कोई आम आदमी विरोध नहीं कर पाता पर यदि कहीं किसी ग्रामसभा के आम आदमी ने विरोध भी करना चाहा तो ग्राम प्रधान लेखपाल एवं अन्य अधिकारीगण मिलकर उसको केवल कागजी कार्रवाईयों में ही उलझाए रखते हैं।

सरोजनी नगर ब्‍लाक के ज्‍यादातर गांवों में नीचे से ऊपर तक अधिकारियों की संलिप्‍ता से अब तालाब, चारागाह, पशु आश्रय, आदि पर कब्‍जा करने का काम जारों से चल रहा हैं सादुल्‍ला नगर, नारायणपुर, ऐन, कंजा खेडा आदि गांव इसकी जीती जागती मिशाल हैं। वहीं जब इस खबर पर संवाददाता ने एसडीएम सरोजनी नगर का वर्जन लेना चाहा तो उनका फोन न‍हीं उठा। जनता की समस्‍याओं से जिम्‍मेंदारों को कोई सरोकार नहीं हैं। ऐसे में विकास की संकल्‍पना की कितनी फलीभूत होगी यह आने वाला समय ही बतायेगा।