सरोजनी नगर इलाके में नदी नहर नलकूपों में पड़ा सूखा, क्‍या करे किसान

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श्रीनिवास सिंह “मोनू”

लखनऊ । पौराणिक नदी सई सहित क्षेत्र की अन्य नहरों में पानी न आने से पशु पक्षियों सहित आम जनमानस के आगे पानी की गंभीर समस्‍या उत्‍पन्‍न हो गई है। आम आदमी की इस समस्‍या से अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं है।

किसानों की दयनीय दशा से वैसे तो सभी परिचित हैं। किसानो को बढ़ती महंगाई के साथ-साथ मौसम की मार उनकी फसलों पर कीटाणुओं से सुरक्षा के अलावा तरह तरह के प्रकोप से बचाना होता है। इस तरह की कई कठिनाइयों का सामना करने के बाद उनकी फसलें तैयार होती हैं।

उनके साथ साथ उनके मवेशियों की गुजर-बसर होती है। फसलों में सिचाई का महत्वपूर्ण योगदान रहता है जो कि नलकूपों के अलावा नहरों द्वारा संभव होता है। यदि नहरों में पानी ही न आए तो किसानों के पास सिंचाई के लिए मात्र नलकूपों का ही सहारा रह जाता है जो की सीमित मात्रा में होने के साथ-साथ उनमें पर्याप्त मात्रा में पानी न होने के कारण किसानों की फसलें सिंचाई के लिए रह जाती हैं जिससे पैदावार पर असर हो जाता है।

आज हम बात कर रहे हैं राजधानी के सरोजनी नगर क्षेत्र में बहने वाली पौराणिक सई नदी की इसके साथ-साथ मोहान रजबहा व अन्य क्षेत्रीय नहरों की जिसमें रबि की फसल के समय तो एक दो बार पानी आने से उनकी सिंचाई थोड़ा बहुत हो गई थी मगर उसके बाद से लगातार इन नहरों में पानी न आने से आम जनमानस भीषण गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहा है।

रबि की फसल कट जाने के बाद किसानों को धान की फसलों की रोपाई करना होता है जिसमें पानी की अत्यंत आवश्यकता होती है किंतु पानी न होने के कारण पूरे क्षेत्र के किसानों की धान की फसल पर संकट के बादल छाए हुए हैं अब उन्हें यही लगता है की इस सीजन में उनकी इस फसल की रोपाई पानी न होने के कारण संभव ही नही हो पाएगी। किसानों की आम की फसल पर पानी न मिलने से बुरा असर पड़ रहा है। उनके आम की पैदावार पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

रवि की फसल कट जाने के बाद कुछ समय तक खाली पड़े खेतों में किसानों के जानवर खुले में चरा करते है। तालाबों में पानी रहने से उन्हें पानी की कोई दिक्कत नहीं होती परंतु सीजन में बरसात न होने के कारण बहुत समय से नहरों में पानी न आने के कारण सारे तालाब सूखे पड़े हैं जिससे पशु पक्षियों जानवरों को भी पीने के लिए पानी नहीं है अगर यही हाल लगातार कुछ दिनों तक और रहा तो पूरे क्षेत्र में तमाम तरह की बीमारियां फैलने लगेंगी।

यही हालात रहे तो पूरे इलाके को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ेगा। इसके अलावा पशु पक्षी एवं जानवर पानी के बिना मरने को मजबूर हो जाएंगे। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारी (जे.ई) से बात हुई तो उनका कहना है, कि नहर आ जाएगी परंतु उनका कहना सिर्फ कोरा आश्वासन ही साबित हो रहा है।