शर्मसार हुई खाकी : योगी सरकार के मुठभेड़ के आदेश से यूपी पुलिस की बल्‍ले–बल्‍ले  

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लखनऊ। प्रदेश की कमान जब से गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्‍यनाथ ने संभाली है तभी से लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में इनकांउटर की बाढ़ सी आ गई है। मुठभेड़ों की बढती संख्‍या पर मनवाधिकार आयोग भी सरकार को नोटिस जारी कर चुका है। अब तक जितने भी इनकाउंटर हुए हैं उनमें कुछ को छोडकर बाकि सब में पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लगता रहा है।

पुलिस इनकांउटर के क्रम में लखनऊ पुलिस ने रविवार को तीन युवकों के साथ आमने सामने मुठभेड़ दिखाई। जिसमें एक युवक शिवकरन उर्फ करन यादव के भागने पर पुलिस ने फायरिंग किया जिससे करन के पैर में गोली लग गई और दो आरोपी पकड़े गयें।

ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम ने घटनास्थल का दौरा किया और आस पास के लोगों से बातचीत की। वहां के लोगों ने मुठभेड़ पर सवाल उठाए और कहा कि पुलिस ने गाड़ी मे युवकों को भरकर लाई थी और उन्हें गाड़ी से धकेल कर गोली मारी थी।
गांव वालों ने यह भी बताया कि जो गाड़ी बरामद हुई है वह वहीं आदमी चलाकर लाया था जो मुठभेड़ के बाद पुलिस वालों के साथ सादे वर्दी में खड़े थे।
घटनास्थल के बाद फोरम के अमित और संजय मुठभेड़ में घायल युवक शिवकरन यादव के घर रैंथा रोड ग्राम फरुखाबाद थाना मडियांव जनपद लखनऊ गये।
वहां पर घायल युवक के पिता मुरली यादव ने बताया की उनके बेटे को कल दिन में पुलिस घर पर ढूढने आयी थी तब लड़का घर से हट गया जिसके कारण वह लोग नहीं ले जा पाये।

जबरन घर से उठाकर लाये पुलिसकर्मी

उन्होंने बताया कि आज तड़के भोर में लगभग 2 से 3 के बीच तीन गाडियों से लगभग 15/16 पुलिस वाले घर का चाहरदीवारी फादकर गेट खोले फिर सभी पुलिस वाले घर के अन्दर आ गये और उनके लड़के को जबरन ले जाने लगे।
तब घरवालो ने लड़के को छुडाने के लिए पुलिस वालो से छीनाझपटी हो गई।
जिसमें पुलिस वालो का बैच बिल्ला वहीं गिर गया। जिस पर पुलिस वाले भड़क गये और शुभकरण के ऊपर रिवाल्वर तानकर घरवालो से बोले की हमें इसे ले जाने दो नहीं तो यही पर गोली मार देगें।
पुलिस की धमकी से परिवार वाले डरकर पीछे हट गये।

घर से टकराकर पुलिस की गाड़ी का शीशा टूटा

परिवार के पीछे हटने पर पुलिस वाले शुभकरण और उसके नई अपाचे गाडी उठाकर ले जाने लगें। पुलिस शुभकरण को लेकर भागने के चक्कर में पुलिस की 100 न. की सफेद रंग की इनोवा पीड़ित के घर के दिवाल पर जोरदार टक्कर लग गया।
जिससे इनोवा की बम्फर और साइड सीसा टूटकर वहीं गिर गया और दिवाल टेडी हो गयीं लेकिन पुलिस रुके नहीं भाग गयें।
फिर पीड़ित परिवार ने 3 बजे के लगभग 100 न पर फोन किया तो वहां से मडियांव थाने पर जाने को कहा गया।
फिर पीड़ित परिवार थाने पर गये वहां बैठे मुंशी ने बताया कि यहां पर शुभकरण को नहीं लाया गया है।

पहले से ही लिखी गई थी मुठभेड़ की कहानी

आप लोग पुलिस अधीक्षक के पास जाइये तब वहां से पीड़ित परिवार 4 बजे एसएसपी लखनऊ के यहां पहुंचे और वहां बैठे अवधेश कुमार से सारी बाते बताया। तो उन्होंने मडियांव थाने पर फोन कर पूछा तो वहां से बताया गया कि थाने पर किसी को भी नहीं लाया गया है।

एसएसपी आवास पर तैनात अवधेश कुमार ने पीड़ित परिवार से कहा की सुबह होने दीजिए हम लडके का पता कर रहे है। एसएसपी आवास पर काफी देर बैठने के बाद पीड़ित परिवार ने अपने परिचित वकील को फोन किया और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, लखनऊ एसएसपी, को पत्र लिखकर जीपीओ डाकघर से स्पीड पोस्ट कर दिया।
सुबह आठ बजे के करीब एक नंबर से उन्हें फोन आया कि उनके लडके को पुलिस मुठभेड़ में गोली लग गई है। लेकिन वह लोग डर के मारे लडके को देखने ट्रामा अस्पताल में नहीं गये कही पुलिस उन्हें भी पकड़ ना ले।
परिजनों ने शुभकरन के साथ पुलिस मुठभेड़ को बिल्कुल फर्जी बताया और और जांच की मांग किया।

दो दिन पहले से उठाकर ले गई थी पुलिस

फोरम के साथी संजय और अमित उक्त फर्जी मुठभेड़ में पकड़े गये दूसरे युवक संजय शुक्ला पुत्र रामआसरे शुक्ला निवासी कुंडरी, रकाबगंज थाना वजीरगंज लखनऊ के घर गये वहां पर घर वाले पुलिस की डर के मारे कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हो रहें थे।
काफी देर प्रयास के बाद बस इतना बताया कि उनके लडके को पुलिस दो दिन पहले घर उठा कर ले गयीं थी पैसे देने की वजह से उसकी जान बच पायी है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने किसी को कुछ भी बताने के लिए मना किया है।

पकड़े गए व्यक्ति से मिलने नहीं दिया

फोरम के सदस्य साथी मुन्ना और सुरेश भारती उक्त फर्जी मुठभेड़ मे पकडे गयें तीसरे युवक बिरेन्द्र के घर पर गयें लेकिन वहां पर कोई नहीं मिला।

आस पास के लोगों ने बताया कि बिरेन्द्र का परिवार पुलिस की डर की वजह से घर से कहीं दूर चले गयें है। बिरेन्द्र के बारे में पूछने पर बताया कि दो तीन दिन पहले पुलिस घर से उठा कर ले गयीं है।

जिसको आज लखनऊ मे मुठभेड़ मे पकडऩे की बात सामने आ रही है जो बिल्कुल गलत है। ह्यूमन राईट मॉनिटरिंग फोरम के साथियों ने मुठभेड़ में घायल शुभकरन से मिलाने गया लेकिन पुलिस ने नहीं मिलाने दिया।

दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

फोरम के जांच में मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी पहले से तैयार कहानी पर आधारित मुठभेड़ निकला जो हम अक्सर अखबारों में पढ़ते रहते है। ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम अपनी जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को भेजकर फर्जी मुठभेड़ की जांच कराने का अनुरोध किया है ताकि फर्जी मुठभेड़ शामिल आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही और पीड़ित परिवार के साथ न्याय हो सकें।

फोरम जांच के दौरान लिए गये साक्ष्य वीडियो और अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखा है ताकि जांच में काम आये।