जानिए ग्रहों की शांति के सरल व अचूक उपाय, आपका जीवन होगा खुशहाल

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ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं जिसमें लाल किताब व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के उपाय सम्मिलित हैं।
संसार में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी ग्रह से पीड़ित है।
हर व्यक्ति धन-धान्य संपन्न भी नहीं है।
ग्रह-पीड़ा के निवारण के लिए निर्धन एवं मध्यम वर्ग का व्यक्ति दुविधा में पड़ जाता है।
यह वर्ग न तो लंबे-चौड़े यज्ञ, हवन या अनुष्ठान करवा सकता है, न ही हीरा, पन्ना, पुखराज जैसे महंगे रत्न धारण कर सकता है।
ज्योतिष विद्या देव विद्या है।
यदि ज्योतिषियों के पास जाएं तो वे प्रायः पुरातन ग्रंथों में से लिए गए उपाय एवं रत्न धारण करने की सलाह दे देते हैं।
परंतु आजकल लोग अनुभव सिद्ध एवं व्यवहारिक उपाय चाहते हैं ताकि आम व्यक्ति, जन सामान्य एवं पीड़ित व्यक्ति लाभ उठा सकें।

ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं- जिसमें लाल किताब के अनुसार व ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपाय बताए गए हैं।पाराशर एस्ट्रोलॉजी के अनुसार-

सूर्य ग्रहों का राजा है।
इसलिए देवाधिदेव भगवान् विष्णु की अराधना से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
सूर्य को जल देना, गायत्री मंत्र का जप करना, रविवार का व्रत करना तथा रविवार को केवल मीठा भोजन करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
सूर्य का रत्न ‘माणिक्य’ धारण करना चाहिए परंतु यदि क्षमता न हो तो तांबे की अंगूठी में सूर्य देव का चिह्न बनवाकर दाहिने हाथ की अनामिका में धारण करें (रविवार के दिन) तथा साथ ही सूर्य के मंत्र का 108 बार जप करें।

मन्त्र- ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

ग्रहों में चंद्रमा को स्त्री स्वरूप माना है।
भगवान शिव ने चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया है।
चंद्रमा के देवता भगवान शिव हैं।
सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं व शिव चालीसा का पाठ करें।
16 सोमवार का व्रत करें तो चंद्रमा ग्रह द्वारा प्रदत्त कष्ट दूर होते हैं।
रत्नों में मोती चांदी की अंगूठी में धारण कर सकते हैं।
चंद्रमा के दान में दूध, चीनी, चावल, सफेद पुष्प, दही (सफेद वस्तुओं) का दान दिया जाता है तथा मंत्र जप भी कर सकते हैं।

मन्त्र- ऊँ सों सोमाय नमः

जन्मकुंडली में मंगल यदि अशुभ हो तो मंगलवार का व्रत करें, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करें। मूंगा रत्न धारण करें या तांबे की अंगूठी बनवाकर
उसमें हनुमान जी का चित्र अंकितकर मंगलवार को धारण कर सकते हैं।
स्त्रियों को हनुमान जी की पूजा करना वर्जित बताया गया है।
मंगल के दान में गुड़, तांबा, लाल चंदन, लाल फूल, फल एवं लाल वस्त्र का दान दें।

मन्त्र-ऊँ अं अंगारकाय नमः

ग्रहों में बुध युवराज है।
बुध यदि अशुभ स्थिति में हो तो हरा वस्त्र न पहनें तथा भूलकर भी तोता न पालें।
अन्यथा स्वास्थ्य खराब रह सकता है।
बुध संबंधी दान में हरी मूंग, हरे फल, हरी सब्जी, हरा कपड़ा दान-दक्षिणा सहित दें व बीज मंत्र का जप करें।

मन्त्र-ऊँ बुं बुधाय नमः

गुरु : गुरु का अर्थ ही महान है सर्वाधिक अनुशासन, ईमानदार एवं कर्त्तव्यनिष्ठ।
गुरु तो देव गुरु हैं। जिस जातक का गुरु निर्बल, वक्री, अस्त या पापी ग्रहों के साथ हो तो वह ब्रह्माजी की पूजा करें।
केले के वृक्ष की पूजा एवं पीपल की पूजा करें।
पीली वस्तुओं (बूंदी के लडडू, पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल, पीले फल) आदि का दान दें।
रत्नों में पुखराज सोने की अंगूठी में धारण कर सकते हैं व बृहस्पति के मंत्र का जप करते रहें।

मन्त्र-ऊँ बृं बृहस्पतये नमः

शुक्र असुरों का गुरु, भोग-विलास, गृहस्थ एवं सुख का स्वामी है।
शुक्र स्त्री जातक है तथा जन समाज का प्रतिनिधित्व करता है।
जिन जातकों का शुक्र पीड़ित करता हो, उन्हें गाय को चारा, ज्वार खिलाना चाहिए एवं समाज सेवा करनी चाहिए। रत्नों में हीरा धारण करना चाहिए या बीज मंत्र का जप करें।

मन्त्र-ऊँ शुं शुक्राय नमः

सूर्य पुत्र शनि, ग्रहों में न्यायाधीश है तथा न्याय सदैव कठोर ही होता है जिससे लोग शनि से भयभीत रहते हैं।
ये चाहे तो राजा को रंक तथा रंक को राजा बना देता है।
शनि पीड़ा निवृत्ति हेतु महामृत्युंजय का जप, शिव आराधना करनी चाहिए।
इनके क्रोध से बचने के लिए काले उड़द, काले तिल, तेल एवं काले वस्त्र का दान दें।
शनि के रत्न (नीलम) को धारण कर सकते हैं।

मन्त्र-ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

राहु की राक्षसी प्रवृत्ति है।
इसे ड्रेगन्स हैड भी कहते हैं।
राहु के दान में कंबल, लोहा, काले फूल, नारियल, कोयला एवं खोटे सिक्के आते हैं।
नारियल को बहते जल में बहा देने से राहु शांत हो जाता है।
राहु की महादशा या अंतर्दशा में राहु के मंत्र का जप करते रहें।
गोमेद रत्न धारण करें।

मन्त्र-ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।

केतु राक्षसी मनोवृत्ति वाले वाले राहु का निम्न भाग है।
राहु शनि के साथ समानता रखता है एवं केतु मंगल के साथ।
इसके आराध्य देव गणपति जी हैं।
केतु के उपाय के लिए काले कुत्ते को शनिवार के दिन खाना खिलाना चाहिए।
किसी मंदिर या धार्मिक स्थान में कंबल दान दें।
रत्नों में लहसुनिया धारण करें।

मन्त्र-ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः

दान मुहूर्त

सूर्य का दान : ज्ञानी पंडित को रविवार दोपहर के समय।
चंद्र का दान : सोमवार के दिन, पूर्णमासी या एकादशी को नवयौवना स्त्री को देना चाहिए।
मंगल का दान : क्षत्रिय नवयुवक को दोपहर के समय।
बुध का दान : किसी कन्या को बुधवार शाम के समय।
गुरु का दान : ब्राह्मण, ज्योतिषी को प्रातः काल।
शुक्र का दान : सायंकाल के समय नवयुवती को।
शनि का दान : शनिवार को गरीब, अपाहिज को शाम के समय।
राहु का दान : कोढ़ी को शाम के समय।
केतु का दान : साधु को देना चाहिए।

नवग्रह शांति के अनुभवसिद्ध सरल उपाय

सूर्य ग्रह को प्रसन्न करने के लिए रविवार को प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें।
जल में लाल चंदन घिसा हुआ, गुड़ एवं सफेद पुष्प भी डाल लें।
साथ ही सूर्य मंत्र का जप करते हुए 7 बार परिक्रमा भी कर लें।

चंद्र ग्रह के लिए हमेशा बुजुर्ग औरतों का सम्मान करें व उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।
चंद्रमा पानी का कारक है।
इसलिए कुएं, तालाब, नदी में या उसके आसपास गंदगी को न फैलाएं।
सोमवार के दिन चावल व दूध का दान करते रहें।

मंगल के लिए हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाएं,
मंगलवार के दिन सिंदूर एवं चमेली का तेल हनुमान जी को अर्पण करें।
इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
यह प्रयोग केवल पुरुष ही करें।

बुध

बुध ग्रह के लिए तांबे का एक सिक्का लेकर उसमें छेद करके बहते पानी में बहा दें।
इसको अपने अनुकूल करने के लिए बहन, बेटी व बुआ को इज्जत दें व उनका आशीर्वाद लेते रहें।
शुभ कार्य (मकान मुर्हूत) (शादी-विवाह) के समय बहन व बेटी को कुछ न कुछ अवश्य दें। उनका आशीर्वाद लें।
कभी-कभी (नपुंसक) का आशीर्वाद भी लेना चाहिए।
बृहस्पति ग्रह के लिए बड़ों का दोनों पांव छूकर आशीर्वाद लें।
पीपल के वृक्ष के पास कभी गंदगी न फैलाएं व जब भी कभी किसी मंदिर, धर्म स्थान के सामने से गुजरें तो सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर जाएं।
बृहस्पति के बीज मंत्र का जप करते रहें।

शुक्र ग्रह यदि अच्छा नहीं है तो पत्नी व पति को आपसी सहमति से ही कार्य करना चाहिए।
व जब घर बनाएं तो वहां कच्ची जमीन अवश्य रखें तथा पौधे लगाकर रखें।
कच्ची जगह शुक्र का प्रतीक है।
जिस घर में कच्ची जगह नहीं होती वहां घर में स्त्रियां खुश नहीं रह सकतीं।
यदि कच्ची जगह न हो तो घर में गमले अवश्य रखें जिसमें फूलों वाले पौधे हों या हरे पौधे हों।
दूध वाले पौधे या कांटेदार पौधे घर में न रखें।
इससे घर की महिलाओं को सेहत संबंधी परेशानी हो सकती है।

शनि ग्रह से पीड़ित व्यक्ति को लंगड़े व्यक्ति की सेवा करनी चाहिए।
चूंकि शनि देव लंगड़े हैं तो लंगड़े, अपाहिज भिखारी को खाना खिलाने से वे अति प्रसन्न होते हैं।

राहु

राहु ग्रह से पीड़ित को कौड़ियां दान करें।
रात को सिरहाने कुछ मूलियां रखकर सुबह उनका दान कर दें।
कभी-कभी सफाई कर्मचारी को भी चाय के लिए पैसे देते रहें।
केतु ग्रह की शांति के लिए गणेश चतुर्थी की पूजा करनी चाहिए।
कुत्ता पालना या कुत्ते की सेवा करनी चाहिए (रोटी खिलाना)।

केतु ग्रह के लिए काले-सफेद कंबल का दान करना भी फायदेमंद है।
केतु-ग्रह के लिए पत्नी के भाई (साले), बेटी के पुत्र (दोहते) व बेटी के पति (दामाद) की सेवा अवश्य करें। यहां सेवा का मतलब है जब भी ये घर आएं तो इन्हें इज्जत दें।