इनकाउंटर में हिजबुल आतंकी टाइगर को सेना कुत्‍तों की तरह मारा

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श्रीनगर। किसी भी गांव में घुसकर मासूम लोगों को पीटना और सुरक्षाबलों पर हमले करने के बाद उसका वीडियो वायरल करना हिजबुल मुजाहिद्दीन के शीर्ष कमांडर समीर टाइगर का शुगल बन गया था।
हिंसक तत्वों की आड़ में अक्सर मुठभेड़ के दौरान बच निकलने वाले दुर्दात समीर टाइगर का दुस्साहस बढ़ता जा रहा था।
एक दिन पहले ही उसने सुरक्षाबलों के साथ काम करने वाले एक स्थानीय युवक की पिटाई करते उसका वीडियो बनाया।

इस वीडियों में समीर टाइगर युवक को कह रहा है कि वह 44 आरआर के मेजर रोहित शुक्ला को जाकर कहे कि अगर दम है तो सामने आकर दिखाए।
शेर जंगल में खुला घूम रहा है।
रविवार शाम को यह वीडियो वायरल हुआ और सोमवार सुबह मेजर रोहित शुक्ला के दस्ते ने उसे घेर लिया।
मुठभेड़ के दौरान मेजर शुक्ला दायें बाजू में गोली लगने से घायल हो गए,
लेकिन ऑपरेशन में डटे रहे।

उन्होंने मुठभेड़स्थल से हटने से इन्कार करते हुए कहा कि पहले इसका काम तमाम कर लें।
घायल होने के बावजूद मेजर और उनके दस्ते ने मात्र आधे घंटे में ही समीर टाइगर और उसके एक साथी कमांडर आकिब खान को ढेर कर बता दिया कि भारतीय सेना शेर का शिकार करना जानती है।

समीर टाइगर ने पूर्व विधायक और मंत्री सइद बशीर अहमद के घर और हवल पुलवामा में सुरक्षाबलों पर हमले की वारदातों को भी अंजाम दिया था।
इसके अलावा उसने कई नागरिकों को सुरक्षाबलों का मुखिबर होने के संदेह में पीटा और कईयों को अगवा भी किया।
उसने कसबयार पुलवामा के दो युवकों बशीर अहमद डार और अल्ताफ अहमद डार को भी अगवा किया था। अल्ताफ को जहां उसे जख्मी हालत में जिंदा छोड़ दिया था वहीं बशीर की मौत हो गई थी।
बीते साल उसने 44 आरआर के एक गश्तीदल पर घात लगाकर हमला किया था,
लेकिन जवाबी कार्रवाई पर भाग निकला था।
इसके बाद उसने कई लोगों के घरों में दाखिल होकर उन्हें पीटा व उनसे सुरक्षाबलों के खिलाफ बयान दिलाते हुए उनके वीडियो भी जारी किए थे।

पुलवामा के द्रबगाम में अपने ही घर के पास साथी संग मारा आतंकी समीर टाइगर को जैश-ए-मोहम्मद ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा,
शोपियां व जिला बड़गाम में अपना आधार बनाने और नए लड़कों को अपने संगठन में शामिल करने के लिए पोस्टर ब्वाय के तौर पर भी इस्तेमाल किया था।
सात अप्रैल 2016 को घर से गायब होकर आतंकी संगठन में सक्रिय होने से पहले वर्ष 2014 से वह न सिर्फ हिजबुल के लिए ओवरग्राउंड वर्कर काम करता था बल्कि पत्थरबाजी में सबसे आगे नजर आता था। शुरू में कुछ माह वह हिजबुल के साथ ही रहा,
लेकिन जल्द ही जैश ने उसे अपने साथ मिला लिया।
सेना की विक्टर फोर्स के एक अधिकारी के अनुसार,
कश्मीर में जब सरहद पार से कोई बड़ा नामी कमांडर आता तो समीर टाइगर अक्सर उसके साथ रहता था।

सरहद पार से जब बीते साल नाटो सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों की खेप पहुंची तो समीर टाइगर के कंधे पर ही सबसे पहले एम-16 कार्बाइन लटकी थी।
इस अमेरिकी राइफल संग उसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।
गत फरवरी में जब श्रीनगर की जेल से पाकिस्तानी आतंकी नवीद जट भागा तो समीर की उसके साथ भी तस्वीरें वायरल हुई थी।
पिछले साल नवंबर में अगलर कंडी इलाके में जैश सरगना मौलाना मूसद अजहर के भतीजे समेत तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद उसने दोबारा हिजबुल का दामन थाम लिया था।

गत अक्तूबर में जब कश्मीर में रहस्यमय हालात में चोटी कटने की घटनाएं हो रही थी तो ठोकरपोरा पुलवामा में समीर व उसके दो अन्य साथायिों को स्थानीय ग्रामीणों ने चोटी काटने वाले गिरोह का सदस्य समझकर बुरी तरह पीटा था,
लेकिन जब पता चला कि वह समीर है तो ग्रामीणों ने डाक्टर का बंदोबस्त करने के अलावा उसे सुरक्षाबलों के पहुंचने से पहले ही वहां से किसी सुरक्षित जगह पहुंचा दिया था।

एक साल से सक्रिय था

मुठभेड़ में मारा गया आतंकी आकिब जुलाई 2017 को आतंकी बना था।
वह समीर टाइगर का दाहिना हाथ कहा जाता था और दोनों अक्सर साथ ही रहते थे।
आकिब ने समीर के साथ मिलकर कई वारदात को अंजाम दिया था।
वह पुलवामा के राजपोरा गांव का रहने वाला था।