सरकार के खिलाफ वाराणसी में फूटा गुस्सा, निकाली आरक्षण बचाओ पदयात्रा

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वाराणसी। केंद्र सरकार के आरक्षण के प्रति अन्यायिक और शोषणकारी रवैये से नाराज दलित पिछडो ने संयुक्तमोर्चा खोल दिया है। सामाजिक अन्याय प्रतिकार मोर्चा के बैनर तले आरक्षण बचाओ पदयात्रा में हजारों लोगों के समूह ने मोदी सरकार के प्रति गुस्साजाहिर किया साथ ही चेतावनी दिया कि यदि मोदी सरकार ने अपने आरक्षण विरोधी रवैये में सुधार नही किया तो इसका परिणाम आगामी लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़सकता है।

इस पदयात्रा के माध्यम से यात्रा में शामिल लोगों ने प्रधानमंत्री को चुनाओं में उनके द्वारा प्रयोग “सबका साथ, सबका विकास”  नारे को याद दिलाया।

साथ ही में विश्वविद्यालयों और न्यायपालिका में इस वर्ग में प्रतिनिधित्व को समुचित संवैधानिक रूप में लागू करने के सन्दर्भ में पदयात्रा में शामिल लोगों की निम्निखित मांगें है।

पिछड़े वर्ग की आरक्षण व्यवस्था को 1993 के संविधान संशोधन के बाद बनी कार्मिक मंत्रालय के 200 पॉइंट रोस्टर के हिसाब से विश्वविद्यालय या महाविद्यालय को यूनिट मानकर लागू किया जाना चाहिए और उस रोस्टर को कोई प्रभावित न कर पाए इससे बचने का मात्र एक उपाय है

आरक्षण नियमावली की उचित व्याख्या करके सब उचित तरीके से व्यवस्थित कर लिया जाय और एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन इसके नियामक के रूप में किया जाय तथा विश्वविद्यालय के रोस्टर में विभाग या संकाय को अल्फाबेट से क्रमित किया जाय,
जिससे कोई व्यक्ति रोस्टर में अपनी मनमानी न करपाए|

पोस्ट पर एसोसिएट और प्रोफ़ेसर के पद के लिए भी पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण पूर्व नियम के अनुसार तत्काल फिर से लागू किया जाय, क्योंकि ओपेन सीट पदोन्नति का सीट नहीं है।

देश की आरक्षण में पहले से कार्यरत पदोन्नति में आरक्षण को पुनः बहाल किया जाय जिससे SC/ST/ OBC कर्मियों को अन्याय से मुक्ति मिले।

जिस प्रकार देश के सभी विभाग भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय की आरक्षण नियमावली को मानतेहै उसी स्वरुप को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भी उस मंत्रालय के अधीन लाया जाय तथा वही रोस्टर विश्वविद्यालय में लगाकर शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां की जाय।