फरीदाबाद के 34 रोहिंग्या शरणार्थीयों को अपना सा लगता है ये शहर

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नई दिल्‍ली। म्यांमार से दर-ब-दर होकर फरीदाबाद पहुंचे रोहिंग्या शरणार्थियों को अब यह शहर अपना-सा लगने लगा है।
थाना खेड़ी पुल पर पुलिस के सत्यापन के दौरान इन शरणार्थियों ने अपने मन की बात बताई और कहा कि अपने वतन की कमी तो कहीं पूरी नहीं हो सकती,
लेकिन भारत में मिल रहा अपनापन उन्हें भा रहा है।
वर्ष 2013 में म्यांमार से आईं नूर बेगम, मोहम्मद इस्माइल और कौसर बेगम अपने परिवारों के साथ ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-86 स्थित बुढ़ैना गांव के पास किराए की जगह पर रह रही हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से मिल रहीं सुविधाओं से वे खुश हैं और यहां रहते हुए देश की कमी नहीं खल रही है।
नूर बेगम कहती हैं कि म्यांमार भी बहुत अच्छा देश है,
लेकिन झगड़े की वजह से हम जैसे लोगों का रहना मुश्किल हो रहा था,
इसलिए म्यांमार को छोड़ना पड़ा।

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थाना खेड़ी पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर सेक्टर-86 गांव बुढ़ैना के पास रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों का सत्यापन किया।
पुलिस ने उनके जरूरी दस्तावेजों को जांचा और उनका यूनाइटेड नैशनल्स हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी कार्ड भी देखे।
पुलिस ने 34 परिवारों की जांच की।
मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि म्यांमार में झगड़ा होने के कारण 2013 में बड़ी संख्या में लोग अपना घर छोड़कर अलग-अलग देशों में जाकर रहने लगे।
इनमें से कुछ शरणार्थी बांग्लादेश के रास्ते कोलकाता पहुंचे और फिर बिहार, मथुरा होते हुए फरीदाबाद आ गए।
इनमें से अलग-अलग ग्रुप बनाकर ये लोग शहर के कई क्षेत्रों में रहने लगे।
इस्माइल 34 परिवारों के साथ ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-86 स्थित गांव बुढ़ैना के पास रह रहे हैं।
ये लोग कबाड़ी का काम करने के साथ-साथ सोसायटी में मजदूरी करके अपने परिवार का निर्वाह कर रहे हैं।
पुलिस नियमित तौर पर इन लोगों का सत्यापन करती है।

सुरक्षा के लिहाज से हम रोहिंग्या मुसलमानों का समय-समय पर सत्यापन करते रहते हैं।
34 परिवारों की जांच की गई है।
जिनकी जमीन पर वे लोग रहते हैं, उन लोगों से भी जानकारी ली जाती है।
उनके यूएनएचसीआर कार्ड भी देखे गए।
यूएनएचसीआर का उद्देश्य शरणार्थियों की समस्याओं के प्रति आपात राहत पुनर्वास सहायता, सुरक्षा तथा स्थाई निदान उपलब्ध कराना है।