LIVE UPDATE: आसाराम की बढीं मुश्किलें, नाबालिग रेप केस में दोषी करार

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नई दिल्ली। एक हजार 667 दिन से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद रेप के आरोपी कथावाचक आसाराम के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है।
नाबालिग बच्ची से रेप के केस में आज राजस्थान के जोधपुर की अदालत फैसला सुनाने वाली है।
अदालत के फैसले के बाद हालात राम रहीम के मामले की तरह ना हों,
आसाराम के समर्थक कोई हिंसा ना करें इसलिए जोधपुर में सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए हैं।
जोधपुर जेल के बाहर भी सुरक्षा बंदोबस्त बेहद कड़े हैं।
सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक जज मधुसूदन शर्मा की कोर्ट फैसला सुना सकती है।

इस मामले में आसाराम के अलावा उसके सेवादार शिवा,
बेहद करीबी शरतचंद्र, छिंदवाड़ा हॉस्टल की वॉर्डन शिल्पी और प्रकाश नाम शख्स भी आरोपी है।
इस पर आरोप है कि इन्होंने लड़की को आसाराम तक पहुंचाने में मदद की।

नाबालिग से रेप केस में आसाराम समेत सभी पांच आरोपियों को दोषी करार दिया गया है।
आसाराम को कितनी सजा होगी इस पर अब सजा होगी।
जानकारी के मुताबिक आसाराम को पॉक्सो एक्ट में भी दोषी करार दिया गया है।
इसलिए दस साल की सजा तो तय मानी जा रही है।
जानकारों के मुताबिक आसाराम के वकील उनकी उम्र का हवाला देकर कम सजा की गुहार करेंगे।

आसाराम को जोधपुर सेंट्रल बैरक नंबर दो से जेल में बने कोर्ट रूम में लाया गया है।
कोर्ट में आने से पहले आसाराम ने 15 मिनट पूजा की,
जिसकी वजह से कार्यवाही 15 मिनट लेट शुरू हुई।
बात दें कि आरोपियों की लिस्ट में पहला नाम आसाराम का है।
इसलिए पहले फैसला भी उनको लेकर ही सुनाया जाएगा।

जेल के अंदर सुनवाई के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
कोर्ट के अंदर जज और आरोपियों के अलावा केस से जुड़े सिर्फ 14 वकील और कोर्ट के स्टाफ को जाने की इजाजत दी गई है।
सुरक्षा के इंतजाम इतने कड़े हैं कि जहां कोर्ट से लगी है उससे काफी दूरी पर सभी वकीलों और कोर्ट स्टाफ के फोन भी जमा करवा लिए गए हैं।

जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहा- हमने राम रहीम के फैसले के वक्त पंचकूला का कवरेज देखा था। हमने उसी हिंसा के मद्देनजर अपनी रणनीति तैयार की है।
जज मधुसूदन शर्मा कोर्ट पहुंचे, यहां से वे जोधपुर सेंट्रल जेल जाएंगे।

आसाराम पर फैसला जोधपुर जेल के भीतर ही सुनाया जाएगा।
फैसला सुनाने वाले जज मधुसूदन शर्मा सबसे पहले जिला अदालत पहुंचेंगे,
वहां कामकाज निपटाएंगे और फिर जोधपुर सेंट्रल जेल जाएंगे।
स्थिति को ध्यान में रखते हुए जज के घर के बाहर भी सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए हैं।

सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए

आसाराम के समर्थकों को शहर में घुसने से रोका जा रहा है।
चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है।
हर अनहोनी से निपटने की तैयारी हो चुकी है,
कल पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया।
आसाराम पर फैसले के पहले एहतियात के तौर पर जोधपुर शहर के आसपास आसाराम के सभी आश्रमों को खाली करवा दिया गया है।
कानून व्यस्वस्था बिगाड़नेवालों के लिए अस्थायी जेलें बनाई गई हैं।
जोधपुर पुलिस के डीसीपी अमनदीप कपूर ने एबीपी न्यूज़ से कहा है कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटेंगे।

आसाराम को कितनी सजा हो सकती है?

जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया है उनमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
आसाराम पर पॉक्सो यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट के तहत मुकदमा चला है।
पीड़िता के वकील ने आसाराम को सख्त से सख्त सजा की मांग की है।

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आसाराम के भक्तों की भक्ति में कमी नहीं

आसाराम भले ही साढ़े चार साल से जेल में बंद है,
रेप जैसा गंभीर आरोप है लेकिन उसके भक्तों में कोई कमी नहीं आई है।
देश में जगह जगह आसाराम के आश्रम हैं जहां भक्त आसाराम की रिहाई के लिए पूजा प्रार्थना कर रहे हैं।
गुजरात के सूरत में भक्तों ने उपवास रखा हुआ है तो हरियाणा के फरीदाबाद में भी पूजा पाठ चल रहा है।
सूरत आश्रम में लोगों का दावा है कि डेढ़ लाख भक्त जुटे हैं।
भक्तों का कहना है कि वो बेकसूर है और आसाराम को फंसाया गया है।

आरोप और पूरा मामला

आसाराम पर शाहजहांपुर की रहने वाली नाबालिग लड़की से यौन शोषण का आरोप है।
पीड़ित लड़की एमपी के छिंदवाड़ा में आसाराम के स्कूल में पढ़ती थी।
लड़की की तबीयत खराब होने पर वॉर्डन ने आसाराम से मिलने को कहा था।

पीड़ित लड़की का परिवार इलाज के लिए उसे जोधपुर के मड़ाई आश्रम ले गया था।
जोधपुर के मड़ाई आश्रम में लड़की ने यौन शोषण का आरोप लगाया था।
15 अगस्त 2013 को नाबालिग लड़की ने यौन शोषण का आरोप लगाया।

31 अगस्त 2013 को इंदौर से आसाराम गिरफ्तार हुआ तब से जोधपुर वो जेल में बंद है।
लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट राम जेठमलानी, सुब्रहमण्यम स्वामी, सलमान खुर्शीद सहित देश के कई जानेमाने वकील जमानत अर्जी पर पैरवी कर चुके हैं लेकिन 12 बार अर्जी खारिज हो चुकी है।

पीड़ित पक्ष के आरोपों पर आसाराम का पक्ष

पीड़ित पक्ष के आरोपों पर आसाराम के पक्ष का कहना है कि लड़ी आरोप लगा रही है लेकिन उसे कमरे से बाहर आते किसी ने नहीं देखा।
पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि लड़की आई थी, कहां से आई थी इसका खुलासा नहीं किया।
इसके अलावा पांच अलग अलग जगहों पर पीड़ित लड़की की जन्मतिथि अलग अलग बताई गई।
कोर्ट में लगाया गया हाई स्कूल सर्टिफिकेट लीगल प्रूफ नहीं है।

आसारम पक्ष का कहना है कि लड़की का केवल अकेला बयान है माता-पिता ने कुछ नहीं देखा और ना ही बताया।
जिरह के दौरान पीड़ित लड़की ने 382 बार कहा कि मुझे याद नहीं है ये पुरानी बात है।
जोधपुर से जयपुर किस गाड़ी में गए इसका भी जवाब लड़की ने नहीं दिया।
दिल्ली के कमला मार्केट में जीरो एफआईआर दर्ज हुई।
एफआईआर जोधपुर भेजने की जगह दिल्ली में ही मेडिकल और बयान होना गलत।

आसाराम पक्ष का यह भी कहना है कि एफआईआर में लड़की ने अपने मन से नहीं बताया कि उसके साथ किसी तरह का दुराचार हुआ है। माता पिता के दबाव डालने पर 4-5 दिन बाद पीड़िता ने यौन शोषण की बात बताई।