एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे हरौनी क्षेत्र के दर्जनों गांव, कैसे हो मरीजों का उपचार

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श्रीनिवास सिंह मोनू

लखनऊ। आज हमारे समाज में तरह तरह की बीमारियां फैल रही हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां मरीजों का अस्पताल दूर होने या फिर अस्पताल के बंद होने पर अस्पताल तक न पहुँच पाने की दशा में मरीज दूसरे अस्पतालों का रुख न करते हुए नजदीकी झोला छाप डॉक्टरों के चक्कर मे आकर अपना समय और पैसा बर्बाद करतें हैं, बाद में जब तक दूसरे अस्पतालों तक पहुँचते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

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वैसे तो सरकारों का जोर हमेशा चिकित्सा सुविधाओं पर रहता है। सरकारे करोड़ों रुपए खर्च भी करती हैं। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों का हाल आज भी जस का तस बना हुआ है। ग्रामीणों को इसका जो लाभ मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता है।

हम बात कर रहे हैं राजधानी से कुछ ही दूर पर स्थित बंथरा कस्बे के हरौनी क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की यहां पर दर्जनों गांव इलाज के लिए केवल इसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। परंतु या स्वास्थ्य केंद्र सुबह 8:00 बजे से खुलकर दोपहर 2:00 बजे ही बंद हो जाता है। औऱ डॉक्टर भी शहर चले जाते हैं।

जिस वजह से दर्जनों गांव के किसान मजदूर अपनी छोटी छोटी मौसमी बीमारियों का इलाज भी समय से नहीं करा पाते, एवं झोलाछाप डॉक्टरों के फेर में फंसकर हमेशा ठगे जाते हैं एवं अपनी जिंदगी  खिलवाड़ करते रहते हैं।

इस संबंध में किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी का कहना है कि स्वास्थ विभाग को इस समस्या का समाधान करना चाहिए। या तो इस में डॉक्टरों की तैनाती  24 घंटे के लिए की जाए या क्षेत्र के इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की जरूरत है। जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों एवं मजदूरों एवं अन्य मरीजों का इलाज समय से सुचारु रुप से संभव हो सके।