पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित होगा पराली जलाने का सिलसिला

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लखनऊ । गेहूं की कटाई का कार्य पिछले कई दिनों से लगातार जारी है। मौसम की गड़बड़ी को देखते हुए बडे किसानों ने मशीन से गेहूं की कटाई का कार्य कराया लिया है।

गेहूं कट जाने के बाद अब किसान पराली जलाने का कार्य शुरू कर दिया है जिसकी वजह से पर्यावरण लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।

तहसील सरोजनी नगर क्षेत्र में इस बार पल पल मौसम के रंग बदलने की वजह से अधिकांश बड़े किसानों ने मशीनों से गेहूं की फसल की कटाई का कार्य कराना ही उचित समझा जिसकी वजह से लगभग गेहूं की फसल कट चुकी है और कटाई का कार्य आखिरी पायदान पर चल रहा है।

इसमें छोटे वा रकबा धारी किसान गेहूं की कटान पर्यावरण मानक के अनुसार कर रहे हैं इसके लिए हंसिया से गेहूं की फसल को जड़ों के पास से काट रहे हैं ऐसी स्थिति में पराली जलाने की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है।

वही बड़े किसान मशीन से गेहूं की कटाई का कार्य करा रहे हैं जिसमें प्रमुख रुप से गेहूं की बालिया ही कटती हैं जबकि अधिकतर हिस्सा खेत में खड़ा रह जाता है जिस को नष्ट करने के लिए इन्हें जलाना पड़ता है इससे निकलने वाला धुआं पर्यावरण को बुरी तरीके से नुकसान पहुंचाता है।

क्षेत्र में लगभग बड़े किसानों ने अपनी गेहूं की फसल को मशीनों से कटाकर कार्य को इतिश्री कर दिया है अब पराली जला रहे हैं जो पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रही है।

लेकिन इस ओर शासन-प्रशासन ध्यान न देकर इन बड़े किसानों को कोई भी सुझाव या रोकथाम जैसी कार्यवाही नहीं कर रहा हैं जिससे आम की फसलों को तगड़ा झटका लग जाने की संभावना है जिसको लेकर आम उत्पादकों में रोष व्याप्त है।