सूखे पड़े तालाबों का पुरसाहाल लेने वाला कोई नहीं, जिम्‍मेदार हैं अनजान

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राहुल तिवारी

लखनऊ। लखनऊ के सरोजनी नगर विकासखंड मे लगभग अधिकाश तालाब लंबे समय से सूखे पडे हैं। सरकार ने मनरेगा से आदर्श तालाबों को खुदवाकर करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिये लेकिन इन तालाबों की दशा में कोई सुधार नहीं है।

जबकि सरकार लगातार गावों के पुराने व मनरेगा एवं आदर्श तालाबों पानी के साथ इन तालाबों का सौन्दर्यीकरण करने के लिए आधिकारियों को आदेश भी दे रही है, लेकिन हालत यह है कि इन तालाबों की सुध लेने वाला न तो कोई जिले का अफसर ही है न ब्लाक के खंड विकास अधिकारी से लगाकर ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव तक, आज दशा यह है कि गांव के पुराने तालाबों को लोग धीरे धीरे पाटते जा रहे और जो तालाब मनरेगा व आदर्श तालाब के तहत खुदवाये गये थे इन तालाबों को खुदवाने में करोडो रुपये खर्च हुये थे आज इन तालाबों को दुर्दशा काफी खराब है।

हम बात करते है सरोजनी नगर विकासखंड सरोजनी नगर के ग्राम रामदासपुर की जहां गढहा तालाब के नाम से गांव में काफी पुराना तालाब है जो शायद लगभग 3 बीघा का था लेकिन आज ये तालाब मात्र 1.5 बीघा का ही रह गया कारण कुछ ग्रामीणों ने इसको पाटकर घर मकान का निर्माण तक करा लिया है।

लेकिन जिले के अधिकारियो ने चाहे व जिला अधिकारी हो या मुख्य विकास अधिकारी क्या इन्होंने गावों मे बने तालाबों की सुधि लेने का प्रयास किया आखिर इन अधिकारियों से इससें सरोकार भी क्या है। आज रामदासपुर के पुराना गढहा तालाब व गांव के बाहर रोड किनारे लखनऊ मोहान रोजवहा नहर के किनारे मनरेगा के तहत बना तालाब सूखा पडा है। जबकि नहर लगातार बह रही है। तालाबों की स्थिति यह है कि इनमें पानी तक नही है ये तालाब सो पीस ही बनाने के लिए खोदे गये थे या फिर सरकारी धनराशि को बर्बाद करने के लिए, जब कि शासन व सरकार ने भी माना है कि लखनऊ जिले का वाटर लेवल दिन पर दिन गिरता जा रहा है।

लेकिन अधिकारियों से इससे कोई सरोकार नही ये अधिकारी केवल योगी सरकार को बदनाम करने पर आमादा है। आज हालत यह है कि सरोजनी नगर के अधिकाशं गावों मे खुदे मनरेगा के तहत तालाब व आदर्श तालाब सूखे पडे है।

क्या कहते है सरोजनी नगर के खंड विकास अधिकारी-इस सम्बंध में जब खंड विकास अधिकारी सरोजनी नगर मुनेश चन्द्र जी से बात की तो उन्होंने कहा कि तालाबों को भरवाने की जिम्मेदारी किसी की नही है। दैवीय आपदा व सूखा पडने पर ही केवल इन तालाबों को भरवाया जाता है। सवाल इस बात का है तो फिर इन तालाबों को खुदवाने की जरूरत ही क्या थी आखिर क्यों सरकार ने खर्च किये करोड़ों रुपये।