बनी-मोहान रोड पर नारायणपुर में बना पशु चिकित्‍सालय अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू

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श्रीनिवास सिंह

लखनऊ। दशकों पहले बने पशु चिकित्सालय की जर्जर इमारत का पुरसा हाल जानने वाला कोई नहीं है।
हरौनी के पास गांव नारायणपुर में दशकों पहले पशु चिकित्सालय का निर्माण किसानों के मवेशियों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए कराया गया था।
इस पशु चिकित्‍सालय से पांच-छह किलोमीटर के दायरे के दर्जनों गांव के किसान अपने जानवरों का इलाज कराने के लिए यहां पर आते हैं।

नहीं होता इलाज

कुछ का इलाज तो ठीक से हो जाता है।
परंतु कुछ जानवरों का इलाज संभव ही नहीं हो पाता।
इसकी सबसे बड़ी वजह चिकित्सालय में उपलब्ध सुविधाएं जैसे दवाओं को ठंडा रखने की कोई व्यवस्था नहीं है, अस्पताल में लाइट ही नहीं है, न ही कोई पेयजल की व्यवस्था है।
और तो और चिकित्सालय की इमारत बिल्कुल जर्जर हो गई है।

जर्जर इतारत की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
इमारत की हालत यह है कि इसके अंदर डॉक्टर बैठने का साहस नहीं जुटा पाते हैं।
इस चिकित्सालय में डॉक्टरों के रात में रुकने के लिए आवास भी बने हैं।
परंतु कोई भी डॉक्टर दिन में ड्यूटी करने के बाद वहां नहीं ठहरता है।
जिस कारण ग्रामीणों को छुट्टी में या दिन के बाद जानवरों की तबीयत खराब हो जाने पर उनके इलाज का कोई रास्ता नहीं रह जाता है।
इसकी शिकायत जब किसान डॉक्टर से करते हैं।
तो उनका कहना होता है कि यहां की इमारत इतनी जर्जर है कि वह रात को ठहरने योग्य नहीं है।
कितनी सरकारें आईं और चली गयीं पर ये पशु चिकित्‍सालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।